राजस्थान के प्रमुख संत

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मध्यकाल में राजस्थान में भक्ति आंदोलन के अनेक महान संत हुए, जिन्होंने जाति-पांति, आडंबर और कुरीतियों का विरोध कर प्रेम, सदाचार और प्रकृति-रक्षा का संदेश दिया। निर्गुण धारा के दादूदयाल व जांभोजी, सगुण धारा की मीराबाई और सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती इनमें प्रमुख हैं।

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दादूदयाल
राजस्थान का कबीर
🌳
जांभोजी
विश्नोई पंथ प्रवर्तक
🪈
मीराबाई
राजस्थान की राधा
🕌
गरीब नवाज़
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती
📑 विषय सूची 9 टॉपिक

निर्गुण भक्ति के संत

📿

संत दादूदयाल

राजस्थान का कबीर · दादू पंथ के प्रवर्तक

अति महत्वपूर्ण
जन्म1544 ई., अहमदाबाद
गुरुवृद्धानंद (बुड्ढन)
प्रमुख कर्मस्थलसांभर, आमेर
निर्वाणनरैना (जयपुर), 1603
भाषासधुक्कड़ी (ढूंढाड़ी मिश्रित)
सत्संग स्थलअलख दरीबा
  • 1574 ई. में सांभर में दादू पंथ की स्थापना की। मुख्य पीठ नरैना में है, जहां भैराणा पहाड़ी पर "दादू खोल" गुफा है।
  • 1585 ई. में फतेहपुर सीकरी में अकबर से भेंट हुई।
  • रचनाएं — "दादूजी री वाणी" व "दादूजी रा दूहा"; इनके उपदेशों का संकलन शिष्य संतदास व जगन्नाथदास ने "हरडेवाणी" में किया।
  • दादू पंथ के साधु शव को न जलाते हैं, न दफनाते हैं — उसे जंगल में पशु-पक्षियों के लिए छोड़ दिया जाता था।
  • दादू पंथ की 5 शाखाएं — खालसा (नरैना), विरक्त, उत्तरादे, खाकी और नागा (सुंदरदास द्वारा)।
  • प्रमुख शिष्य (52 शिष्य — "52 स्तंभ") — गरीबदास (पुत्र), मिस्कीनदास, रज्जब (सांगानेर), सुंदरदास (दौसा)।
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जांभोजी

विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक · पर्यावरण प्रेमी संत

अति महत्वपूर्ण
जन्म1451 ई., पीपासर (नागौर)
पिता / मातालोहट जी पंवार / हंसा देवी
पंथ स्थापना1485 ई., समराथल धोरा (बीकानेर)
नियम29 (20+9 = बीस+नौ)
समाधिमुकाम (नोखा, बीकानेर)
निर्वाण स्थललालासर (बीकानेर)
  • 29 नियमों के कारण अनुयायी "विश्नोई" (बीस + नौ) कहलाए। नियमों में हरे वृक्ष न काटना, जीव-हत्या न करना, नशा न करना प्रमुख हैं।
  • उपदेश "जंभ सागर" व "जंभवाणी" में संकलित; इनकी वाणी "शबदवाणी" कहलाती है।
  • मुकाम में वर्ष में दो बार — फाल्गुन अमावस्या व आश्विन अमावस्या — मेला भरता है।
  • खेजड़ली बलिदान (1730 ई.): जोधपुर के खेजड़ली गांव में खेजड़ी वृक्षों को बचाने के लिए अमृता देवी विश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने बलिदान दिया (भाद्रपद शुक्ल दशमी)। उस समय जोधपुर के शासक अभयसिंह थे। यहां विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला भरता है।
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जसनाथ जी

जसनाथी संप्रदाय के प्रवर्तक

महत्वपूर्ण
जन्म1482 ई., कतरियासर (बीकानेर)
जातिजाट (ज्याणी)
तपस्यागोरखमालिया
नियम36
  • जसनाथी अनुयायी काली ऊन का धागा गले में पहनते हैं; इनके सिद्ध अग्नि नृत्य करते हैं।
  • उपदेश "सिंभूदड़ा" व "कोंडो" ग्रंथों में संकलित।
  • संप्रदाय के प्रमुख केंद्र (बाड़ी) — कतरियासर (मुख्य), बमलू, लिखमादेसर, पूनरासर, मालासर।
  • सिकंदर लोदी ने जसनाथ जी को भूमि भेंट की थी।

💛 चरणदास जी

चरणदासी संप्रदाय; जन्म डेहरा (अलवर)। मुख्य पीठ दिल्ली। 42 नियम; अनुयायी पीले वस्त्र पहनते हैं। नादिरशाह के आक्रमण की भविष्यवाणी की। शिष्याएं — सहजोबाई व दयाबाई।

🕊️ लालदास जी

लालदासी संप्रदाय; मेव जाति में जन्म, धोली दूव (अलवर)। मेवात क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश। समाधि शेरपुर (अलवर)।

🌾 संत धन्ना

जन्म धुवन गांव (टोंक), जाट परिवार; रामानंद के शिष्य। राजस्थान में भक्ति आंदोलन का प्रारंभ इन्हीं से माना जाता है।

🪡 संत पीपा

गागरोन के खींची शासक प्रतापराव; रामानंद के शिष्य बनकर राजपाट छोड़ा। दर्जी समाज इन्हें आराध्य मानता है। टोडाराय सिंह (टोंक) में पीपा गुफा; समदड़ी में पीपा जी का मंदिर।

🔮 संत मावजी

जन्म साबला (डूंगरपुर); बेणेश्वर धाम के संस्थापक। विष्णु के "निष्कलंक अवतार" माने गए। भविष्यवाणियां "चौपड़ा" ग्रंथ में।

🙏 संत रैदास

रामानंद के शिष्य; मीराबाई के गुरु। चित्तौड़गढ़ में इनकी छतरी है। उपदेश "रैदास की परची" में।

सगुण भक्ति एवं कवयित्री संत

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मीराबाई

राजस्थान की राधा · कृष्ण भक्त कवयित्री

अति महत्वपूर्ण
जन्मकुड़की गांव (जैतारण क्षेत्र)
पितारतनसिंह राठौड़
दादाराव दूदा (मेड़ता)
पतिभोजराज (राणा सांगा के पुत्र)
गुरुसंत रैदास
अंतिम समयद्वारका (रणछोड़ मंदिर)
  • बचपन मेड़ता में बीता; पति की मृत्यु के बाद कृष्ण भक्ति में लीन हुईं और ससुराल पक्ष के अत्याचार सहे।
  • रचनाएं — "पदावली", "गीत गोविंद की टीका", "राग गोविंद"; "नरसी जी रो मायरो" भी इनसे संबद्ध मानी जाती है।
  • मेड़ता में चारभुजा नाथ मंदिर व मीरा स्मारक (पैनोरमा) है।

🌼 गवरी बाई

"वागड़ की मीरा" — डूंगरपुर; कृष्ण भक्ति के पद। महारावल शिवसिंह ने इनके लिए बालमुकुंद मंदिर बनवाया।

🍲 करमा बाई

कालवा (नागौर); मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ ने इनके हाथ का खीचड़ा खाया था।

🌺 राना बाई

"राजस्थान की दूसरी मीरा"; हरनावां गांव (परबतसर क्षेत्र); जीवित समाधि ली।

🕯️ भूरी बाई "अलख"

सरदारगढ़ (राजसमंद); निर्गुण-सगुण दोनों धाराओं की भक्त कवयित्री।

💫 सहजोबाई व दयाबाई

चरणदास जी की शिष्याएं; सहजोबाई ने "सहज प्रकाश" और दयाबाई ने "दयाबोध" की रचना की।

सूफी संत

🕌 ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती

"गरीब नवाज़"; मुहम्मद गौरी के समय (1192 के आसपास) अजमेर आए; भारत में चिश्ती सिलसिले के संस्थापक। अजमेर दरगाह पर रजब माह की 1 से 6 तारीख तक उर्स। अकबर पैदल यात्रा कर यहां आया था।

🌙 हमीदुद्दीन नागौरी

ख्वाजा साहब के शिष्य; नागौर में दरगाह। "सुल्तान-ए-तारकीन" (संन्यासियों का सुल्तान) कहलाए; सादा शाकाहारी जीवन।

☪️ पीर फखरुद्दीन

गलियाकोट (डूंगरपुर) में दरगाह; दाऊदी बोहरा समाज का प्रमुख तीर्थ।

🕋 मीरान साहब

तारागढ़ (अजमेर) दुर्ग में दरगाह; तारागढ़ के किलेदार सैयद हुसैन।

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) “राजस्थान का कबीर” — दादूदयाल; निर्वाण — नरैना। (2) मीराबाई के गुरु — रैदास। (3) “वागड़ की मीरा” — गवरी बाई; “दूसरी मीरा” — राना बाई।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. "राजस्थान का कबीर" — दादूदयाल; निर्वाण — नरैना।
  2. दादू की अकबर से भेंट — 1585, फतेहपुर सीकरी।
  3. जांभोजी का जन्म — पीपासर (नागौर), 1451; समाधि — मुकाम।
  4. जसनाथ जी का जन्म — कतरियासर (बीकानेर)।
  5. मीराबाई के गुरु — रैदास; पति — भोजराज।
  6. "वागड़ की मीरा" — गवरी बाई; "राजस्थान की दूसरी मीरा" — राना बाई।
  7. जगन्नाथ को खीचड़ा खिलाने वाली — करमा बाई (कालवा)।
  8. बेणेश्वर धाम के संस्थापक — संत मावजी।
  9. दर्जी समाज के आराध्य — संत पीपा (गागरोन के प्रतापराव)।
  10. "गरीब नवाज़" — ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती; "सुल्तान-ए-तारकीन" — हमीदुद्दीन नागौरी।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 "राजस्थान का कबीर" किस संत को कहा जाता है?

2 संत दादूदयाल का निर्वाण कहां हुआ?

3 जांभोजी का जन्म कहां हुआ?

4 मीराबाई के गुरु कौन थे?

5 "वागड़ की मीरा" किसे कहा जाता है?

6 भगवान जगन्नाथ को खीचड़ा खिलाने की मान्यता किस भक्त से जुड़ी है?

7 बेणेश्वर धाम के संस्थापक कौन थे?

8 संत पीपा किस समाज के आराध्य माने जाते हैं?

9 लालदास जी का जन्म किस जाति में हुआ?

10 "सुल्तान-ए-तारकीन" किसे कहा गया?

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