राजस्थान के धार्मिक संप्रदाय
राजस्थान में भक्ति आंदोलन के दौरान अनेक धार्मिक संप्रदाय विकसित हुए। निर्गुण संप्रदायों (दादू पंथ, विश्नोई, जसनाथी, रामस्नेही) ने निराकार ईश्वर और सदाचार पर बल दिया, जबकि सगुण संप्रदायों (वल्लभ, रामानंदी, निंबार्क) की प्रमुख पीठें नाथद्वारा, गलता और सलेमाबाद में हैं।
📑 विषय सूची 8 टॉपिक
एक नज़र में — संप्रदाय, प्रवर्तक व पीठ
| संप्रदाय | प्रवर्तक | प्रमुख पीठ / स्थान | विशेष |
|---|---|---|---|
| दादू पंथ | दादूदयाल | नरैना (जयपुर) | 5 शाखाएं, अलख दरीबा |
| विश्नोई | जांभोजी | मुकाम (बीकानेर) | 29 नियम |
| जसनाथी | जसनाथ जी | कतरियासर (बीकानेर) | 36 नियम, अग्नि नृत्य |
| रामस्नेही | रामचरण जी | शाहपुरा (भीलवाड़ा) | गुलाबी वस्त्र, फूलडोल मेला |
| चरणदासी | चरणदास जी | दिल्ली | 42 नियम, पीले वस्त्र |
| लालदासी | लालदास जी | शेरपुर (अलवर) | मेव संत |
| निष्कलंक | संत मावजी | बेणेश्वर (डूंगरपुर) | चौपड़ा ग्रंथ |
| कामड़िया | रामदेवजी | रामदेवरा (जैसलमेर) | तेरहताली |
रामस्नेही संप्रदाय
निर्गुण राम की उपासना · चार प्रमुख पीठ
- रामस्नेही साधु गुलाबी वस्त्र पहनते हैं और मूर्ति पूजा नहीं करते; राम नाम का जाप करते हैं।
- रामचरण जी का जन्म सोडा गांव (टोंक) में हुआ; मूल नाम रामकिशन। उनकी वाणी "अणभै वाणी" में संकलित।
- शाहपुरा में फूलडोल मेला — चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से पंचमी तक।
- रामस्नेहियों का मंदिर "रामद्वारा" कहलाता है।
अन्य निर्गुण संप्रदाय
| संप्रदाय | प्रवर्तक | प्रमुख केंद्र |
|---|---|---|
| निरंजनी | संत हरिदास जी | गाढ़ा (डीडवाना क्षेत्र) |
| नवल | संत नवलदास जी | जोधपुर |
| अलखिया | लालगिरी जी | बीकानेर |
| गूदड़ | संतदास जी | दांतड़ा (भीलवाड़ा) |
| परनामी | प्राणनाथ जी | मुख्य पीठ पन्ना (मप्र); जयपुर में मंदिर |
दादू पंथ की शाखाएं
🏛️ खालसा
नरैना की मुख्य गद्दी से जुड़े साधु।
🚶 विरक्त
घूम-घूमकर उपदेश देने वाले गृहत्यागी साधु।
🧭 उत्तरादे
राजस्थान से उत्तर की ओर (हरियाणा क्षेत्र) जाकर बसे साधु।
🔥 खाकी
शरीर पर भस्म लगाने वाले, खाकी वस्त्रधारी साधु।
⚔️ नागा
सुंदरदास जी द्वारा प्रवर्तित; शस्त्रधारी साधु।
निर्गुण व सगुण संप्रदायों में अंतर
🕊️ निर्गुण
निराकार ईश्वर की उपासना; मूर्ति पूजा का विरोध; गुरु व नाम-स्मरण पर बल — दादू, विश्नोई, जसनाथी, रामस्नेही, चरणदासी, लालदासी।
🛕 सगुण
साकार ईश्वर (राम-कृष्ण) की उपासना; मूर्ति पूजा व मंदिर — वल्लभ, रामानंदी, निंबार्क, गौड़ीय।
प्रमुख सगुण संप्रदाय व पीठ
| संप्रदाय | प्रवर्तक | राजस्थान में प्रमुख पीठ |
|---|---|---|
| वल्लभ (पुष्टिमार्ग) | वल्लभाचार्य | नाथद्वारा (राजसमंद) — श्रीनाथजी; कांकरोली — द्वारकाधीश |
| रामानंदी | रामानंद | गलता (जयपुर) — कृष्णदास पयहारी ने पीठ स्थापित की ("उत्तर तोताद्रि") |
| निंबार्क | निंबार्काचार्य | सलेमाबाद (किशनगढ़, अजमेर) — परशुराम देवाचार्य |
| गौड़ीय | चैतन्य महाप्रभु | गोविंददेव जी (जयपुर), करौली का मदनमोहन मंदिर |
| नाथ संप्रदाय | गोरखनाथ / मत्स्येंद्रनाथ | महामंदिर (जोधपुर) — मानसिंह द्वारा, आयस देवनाथ |
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) नियम — विश्नोई 29, जसनाथी 36, चरणदासी 42। (2) रामस्नेही मुख्य पीठ — शाहपुरा; निंबार्क — सलेमाबाद; रामानंदी — गलता। (3) वल्लभ (पुष्टिमार्ग) — नाथद्वारा; नाथ — महामंदिर (जोधपुर)।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- विश्नोई पंथ — जांभोजी, 1485, समराथल धोरा; 29 नियम।
- जसनाथी — 36 नियम, केंद्र कतरियासर; चरणदासी — 42 नियम।
- दादू पंथ की 5 शाखाएं — खालसा, विरक्त, उत्तरादे, खाकी, नागा।
- रामस्नेहियों की मुख्य पीठ — शाहपुरा; अन्य — रैण, सिंहथल, खेड़ापा।
- रामस्नेही मंदिर — रामद्वारा; वस्त्र — गुलाबी; मेला — फूलडोल।
- निरंजनी संप्रदाय — हरिदास जी।
- वल्लभ संप्रदाय की पीठ — नाथद्वारा; रामानंदी — गलता।
- निंबार्क संप्रदाय की पीठ — सलेमाबाद।
- नाथ संप्रदाय का महामंदिर — जोधपुर (मानसिंह)।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 विश्नोई संप्रदाय में कितने नियम हैं?
2 जसनाथी संप्रदाय का प्रमुख केंद्र कौन-सा है?
3 चरणदासी संप्रदाय में कितने नियम हैं?
4 रामस्नेही संप्रदाय की मुख्य पीठ कहां है?
5 रामस्नेही साधु किस रंग के वस्त्र पहनते हैं?
6 निरंजनी संप्रदाय के प्रवर्तक कौन थे?
7 वल्लभ (पुष्टिमार्ग) संप्रदाय की प्रमुख पीठ कहां है?
8 रामानंदी संप्रदाय की प्रमुख पीठ कहां है?
9 निंबार्क संप्रदाय की प्रमुख पीठ कहां है?
10 जोधपुर का महामंदिर किस संप्रदाय से संबंधित है?