राजस्थान के लोक नाट्य

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लोक नाट्य जनसाधारण का रंगमंच है, जिसमें संवाद, गीत, संगीत और नृत्य एक साथ चलते हैं। राजस्थान में ये खुले मैदान, चौक या अखाड़ों में रात-रात भर खेले जाते थे। इनके विषय पौराणिक कथाएं, लोक गाथाएं, वीर रस और सामाजिक व्यंग्य होते हैं।

🎭
ख्याल
सबसे लोकप्रिय लोक नाट्य
🏔️
गवरी
लोक नाट्यों का मेरुनाट्य
👑
तमाशा
जयपुर का भट्ट परिवार
🔥
रम्मत
बीकानेर-जैसलमेर, होली
📑 विषय सूची 7 टॉपिक

ख्याल

18वीं सदी में विकसित ख्याल राजस्थान का सबसे लोकप्रिय लोक नाट्य है। इसमें पद्यबद्ध संवाद गाकर बोले जाते हैं। इसमें अभिनय करने वाले कलाकार "खिलाड़ी" और ख्याल लिखने-सिखाने वाला गुरु "उस्ताद" कहलाता है। क्षेत्र के अनुसार इसकी कई शैलियां हैं:

ख्याल शैलीक्षेत्रप्रवर्तक / प्रसिद्ध कलाकारविशेषता
कुचामनी ख्यालकुचामन (डीडवाना-कुचामन)लच्छीराम; उगमराजओपेरा जैसा; स्त्री पात्र पुरुष निभाते हैं; सामाजिक व्यंग्य
शेखावाटी (चिड़ावी) ख्यालचिड़ावा (झुंझुनूं)नानूराम; दूलिया राणाअच्छा गायन व पदचालन; हारमोनियम, सारंगी, नगाड़ा
जयपुरी ख्यालजयपुर—स्त्री पात्रों की भूमिका स्त्रियां भी निभाती हैं; नए प्रयोग
तुर्रा-कलंगीघोसुंडा, निंबाहेड़ा (चित्तौड़गढ़)शाहअली व तुकनगीर; जयदयाल सोनी, चेतरामतुर्रा = शिव, कलंगी = पार्वती; मंच सजावट सबसे अधिक; दर्शक भी भाग लेते हैं
अलीबख्शी ख्यालअलवर (मुंडावर)अलीबख्श — "अलवर का रसखान"कृष्ण भक्ति प्रधान
हेला ख्याललालसोट (दौसा), सवाई माधोपुर—नौबत वाद्य; लंबी टेर ("हेला") में गायन
कन्हैया ख्यालकरौली, सवाई माधोपुर, धौलपुरमीणा समाजकथा कहने वाला "मेड़िया"; कृष्ण कथाएं
ढप्पाली ख्यालअलवर, भरतपुर—ढप (डफ) प्रमुख वाद्य

प्रमुख लोक नाट्य

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गवरी (राई)

भीलों का धार्मिक नृत्य-नाट्य · लोक नाट्यों का मेरुनाट्य

अति महत्वपूर्ण
जनजातिभील (मेवाड़)
समयभाद्रपद से आश्विन, लगभग 40 दिन
कलाकारकेवल पुरुष
कथाशिव-भस्मासुर
  • राजस्थान का सबसे प्राचीन लोक नाट्य; इसे "लोक नाट्यों का मेरुनाट्य" कहा जाता है।
  • शिव को "राई बुढ़िया" और पार्वती को "राई" कहा जाता है। सूत्रधार की भूमिका निभाने वाला पात्र "कुटकड़िया" कहलाता है।
  • कलाकार 40 दिन तक हरी सब्ज़ी नहीं खाते, ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और नहाते नहीं।
  • मुख्य कथा के बीच-बीच में छोटी नाटिकाएं "खेल" होती हैं; मांदल व थाली प्रमुख वाद्य।
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तमाशा (जयपुर)

भट्ट परिवार का संगीत प्रधान नाट्य

महत्वपूर्ण
  • जयपुर के महाराजा सवाई प्रतापसिंह के समय महाराष्ट्र से आए बंशीधर भट्ट ने इसकी शुरुआत की।
  • यह खुले मंच पर खेला जाता है, जिसे "अखाड़ा" कहते हैं; राग-रागिनियों पर आधारित।
  • प्रसिद्ध तमाशे — गोपीचंद, हीर-रांझा, जोगी-जोगन, जुट्ठन मियां, छैला पणिहारी।
  • भट्ट परिवार के प्रसिद्ध कलाकार — गोपीकृष्ण भट्ट (गोपीजी), वासुदेव भट्ट।
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रम्मत

बीकानेर व जैसलमेर · होली पर

महत्वपूर्ण
  • होली के अवसर पर पुष्करणा ब्राह्मण समाज द्वारा खेला जाता है; मंच के रूप में "पाटा" (लकड़ी का तख्त) प्रयोग होता है।
  • रम्मत शुरू होने से पहले रामदेवजी का भजन गाया जाता है।
  • जैसलमेर के तेज कवि ने रम्मत को लोकप्रिय बनाया; उन्होंने 1943 में "स्वतंत्रता बावनी" लिखकर गांधीजी को भेंट की।
  • बीकानेर के कलाकार — मनीराम व्यास, फागू महाराज, सुआ महाराज। प्रसिद्ध रम्मतें — हेड़ाऊ मेरी, स्वतंत्रता बावनी, छेले तंबोलन, अमरसिंह राठौड़।

🥁 नौटंकी

भरतपुर, धौलपुर, करौली क्षेत्र में; नगाड़ा प्रमुख वाद्य। हाथरस शैली से प्रभावित। प्रसिद्ध कलाकार — गिरिराज प्रसाद (कामां)। 9 वाद्यों का प्रयोग होता है।

🎭 स्वांग (बहरूपिया)

किसी पौराणिक/लोक पात्र का रूप धरकर अभिनय। भांड जाति प्रसिद्ध। जानकीलाल भांड (भीलवाड़ा) — "मंकी मैन" के रूप में अंतरराष्ट्रीय ख्याति।

🕌 चारबैत

टोंक का लोक नाट्य; पठानी मूल का। अब्दुल करीम खां निहंग ने इसे प्रचलित किया। डफ वाद्य के साथ बैठकर गायन।

🙏 सनकादिकों की लीला

घोसुंडा व बस्सी (चित्तौड़गढ़) में आश्विन मास में; भगवान विष्णु के अवतारों व सनकादिक ऋषियों की कथा।

💃 रासलीला

कृष्ण की लीलाओं का मंचन; वल्लभ संप्रदाय से संबंधित। फुलेरा (जयपुर) की रासलीला प्रसिद्ध — शिवलाल कुमावत।

🏹 रामलीला

बिसाऊ (झुंझुनूं) की मूक रामलीला — संवाद नहीं, केवल अभिनय। पाटूंदा (कोटा) की रामलीला व अटरू (बारां) की रामलीला, जहां धनुष राम नहीं बल्कि जनता तोड़ती है।

🎪 भवाई नाट्य

भवाई जाति का व्यावसायिक नाट्य; हास्य-व्यंग्य प्रधान। शांता गांधी ने इसके आधार पर "जस्मा ओडन" नाटक लिखा।

⚔️ दंगल

पूर्वी राजस्थान (धौलपुर, करौली) में भेंट के दंगल व कन्हैया दंगल — दो दल आमने-सामने गीत-संवाद की प्रतियोगिता करते हैं।

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) ख्याल के रूप — कुचामनी (लच्छीराम), शेखावाटी (नानूराम), जयपुरी। (2) रम्मत — बीकानेर-जैसलमेर, होली पर; तमाशा — जयपुर (बंशीधर भट्ट)। (3) “लोक नाट्यों का मेरुनाट्य” — गवरी (भील)।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. कुचामनी ख्याल के प्रवर्तक — लच्छीराम।
  2. शेखावाटी ख्याल — नानूराम (चिड़ावा)।
  3. तुर्रा-कलंगी के प्रवर्तक — शाहअली व तुकनगीर; तुर्रा = शिव, कलंगी = पार्वती।
  4. "अलवर का रसखान" — अलीबख्श।
  5. "लोक नाट्यों का मेरुनाट्य" — गवरी (भील); सूत्रधार — कुटकड़िया।
  6. तमाशा — जयपुर, बंशीधर भट्ट, सवाई प्रतापसिंह के समय; मंच — अखाड़ा।
  7. रम्मत का मंच — पाटा; "स्वतंत्रता बावनी" — तेज कवि।
  8. चारबैत — टोंक।
  9. मूक रामलीला — बिसाऊ (झुंझुनूं)।
  10. "मंकी मैन" — जानकीलाल भांड।
  11. नौटंकी — भरतपुर-धौलपुर (हाथरस शैली)।
  12. चारबैत — टोंक (पठानी शैली)।
  13. तुर्रा-कलंगी — चित्तौड़गढ़ (शाहअली व तुकनगीर)।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 कुचामनी ख्याल के प्रवर्तक कौन थे?

2 "लोक नाट्यों का मेरुनाट्य" किसे कहा जाता है?

3 तुर्रा-कलंगी ख्याल में "तुर्रा" किसका प्रतीक है?

4 तमाशा लोक नाट्य किस शहर से संबंधित है?

5 रम्मत किस अवसर पर खेली जाती है?

6 चारबैत लोक नाट्य किस जिले का है?

7 मूक रामलीला कहां प्रसिद्ध है?

8 "अलवर का रसखान" किसे कहा जाता है?

9 गवरी नाट्य में सूत्रधार की भूमिका किस पात्र की होती है?

10 "मंकी मैन" के नाम से प्रसिद्ध बहरूपिया कलाकार कौन हैं?

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