राजस्थान के लोक वाद्य यंत्र

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राजस्थान के लोक संगीत की आत्मा इसके लोक वाद्य हैं। लंगा, मांगणियार, भोपे, कालबेलिया और जनजातियां इन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी बजाती आई हैं। संरचना और बजाने के ढंग के आधार पर वाद्यों को चार वर्गों में बांटा जाता है।

🎻
तत
तार वाले वाद्य
🪈
सुषिर
फूंक से बजने वाले
🥁
अवनद्ध
चमड़े से मढ़े हुए
🔔
घन
धातु से बने
📑 विषय सूची 9 टॉपिक

वाद्यों का वर्गीकरण

वर्गपहचानप्रमुख वाद्य
तत वाद्यतार वाले; अंगुली या गज से बजते हैंसारंगी, कमायचा, रावणहत्था, जंतर, इकतारा, भपंग, चिकारा, तंदूरा, सुरिंदा, रबाब
सुषिर वाद्यफूंक मारकर बजाए जाते हैंअलगोजा, शहनाई, पूंगी, सतारा, नड़, मशक, मोरचंग, बांकिया, भूंगल, करणा, सींगा, मुरला
अवनद्ध वाद्यचमड़े से मढ़े हुए (ताल वाद्य)ढोल, नगाड़ा, चंग, डफ, खंजरी, मांदल, डेरू, डमरू, धौंसा, ढाक, मृदंग, तासा
घन वाद्यधातु से बने, आपस में टकराकर बजते हैंमंजीरा, खड़ताल, झांझ, थाली, घंटा, घुंघरू, चिमटा, श्रीमंडल, झालर, रमझोल

तत वाद्य (तार वाले)

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सारंगी

तत वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ

अति महत्वपूर्ण
लकड़ीसागवान, कैर या रोहिड़ा
तार27 (तांत व धातु के)
गजघोड़े की पूंछ के बाल
वादकलंगा, मिरासी, जोगी
  • गज पर बिरोजा लगाकर बजाई जाती है। मारवाड़ के जोगी इसके साथ गोपीचंद, भर्तृहरि व निहालदे के गीत गाते हैं।
  • लंगा जाति की सिंधी सारंगी और गुजरातन सारंगी प्रसिद्ध हैं। सिंधी सारंगी वादक लाखा खां को 2021 में पद्मश्री मिला।

🪕 कमायचा

सारंगी जैसा, पर तबली गोल और चमड़े से मढ़ी। 16 तार; आम या शीशम की लकड़ी। मांगणियार जाति (जैसलमेर-बाड़मेर) बजाती है। प्रसिद्ध वादक — साकर खां मांगणियार (पद्मश्री)।

🥥 रावणहत्था

नारियल के कटोरे पर खाल मढ़कर बांस की डंडी लगाई जाती है; 9 तार। गज में घुंघरू बंधे होते हैं। पाबूजी की फड़ बांचते समय भोपे बजाते हैं।

🎼 जंतर

वीणा जैसा वाद्य; दो तूंबे लगे होते हैं, 22 पर्दे। गुर्जर भोपे गले में लटकाकर देवनारायण की फड़ बांचते समय बजाते हैं।

🎐 भपंग

तूंबे से बना, डमरू जैसा दिखने वाला; एक तार। अलवर-मेवात की जोगी जाति। प्रसिद्ध वादक — जहूर खां मेवाती, उमर फारूक मेवाती।

1️⃣ इकतारा

एक तार वाला, तूंबे पर बांस लगाकर बनाया जाता है। नाथ व कालबेलिया साधु भजन गाते समय एक हाथ से बजाते हैं।

🪕 तंदूरा (चौतारा)

4 तार वाला; कामड़ जाति रामदेवजी के भजनों में बजाती है। इसे वेणो भी कहते हैं।

🎶 चिकारा

कैर की लकड़ी से बना; अलवर-भरतपुर क्षेत्र के मेव लोग बजाते हैं।

🎵 सुरिंदा

लंगा जाति का वाद्य; सतारा व मुरला के साथ संगत में बजाया जाता है।

🪕 रबाब

मेवाड़ के भाट व राव बजाते हैं; चमड़े से मढ़ी तबली वाला तार वाद्य।

सुषिर वाद्य (फूंक वाले)

🪈 अलगोजा

दो बांसुरियां एक साथ मुंह में रखकर बजाई जाती हैं। भील, मीणा व ग्वाले बजाते हैं; तेजाजी व ढोला-मारू के गीतों में प्रयोग।

🎺 शहनाई

शीशम या सागवान की लकड़ी, 8 छेद; ऊपर ताड़ के पत्ते की पत्ती। मांगलिक वाद्य — विवाह व उत्सवों पर नगाड़े के साथ।

🐍 पूंगी (बीन)

तूंबे में दो नलियां लगाकर; कालबेलिया सपेरे सांप पकड़ते व नृत्य के समय बजाते हैं।

🎷 सतारा

अलगोजा, बांसुरी व शहनाई का समन्वित रूप; जैसलमेर-बाड़मेर के लंगा व मेघवाल बजाते हैं।

🎋 नड़

कगोर वृक्ष की लकड़ी से बना, लगभग एक मीटर लंबा; जैसलमेर का वाद्य। प्रसिद्ध वादक करणा भील — जिनकी लंबी मूंछें गिनीज़ बुक में दर्ज हुईं।

🎐 मोरचंग

लोहे का छोटा वाद्य, होठों के बीच रखकर अंगुली से बजाया जाता है; लंगा गायकों द्वारा।

🫁 मशक

भेड़ या बकरी की खाल से बनी थैली में हवा भरकर; भैरूजी के भोपे बजाते हैं। (बैगपाइप जैसा)

📯 बांकिया

पीतल का बड़ा बिगुल जैसा मांगलिक वाद्य; सरगड़ा जाति विवाह व उत्सवों पर बजाती है।

⚔️ भूंगल

पीतल का लंबा वाद्य; युद्ध के समय रणभेरी के रूप में। मेवाड़ के भवाई कलाकार खेल शुरू करने से पहले बजाते हैं।

📣 करणा

पीतल का बहुत लंबा (7-8 फीट) वाद्य; विजय घोष व जुलूसों में बजाया जाता था।

🦬 सींगा

सींग या पीतल का बना; जोगी व नाथ साधु बजाते हैं।

अवनद्ध वाद्य (चमड़े से मढ़े)

वाद्यबनावट / प्रयोगसंबंधित जाति / अवसर
ढोललोहे या लकड़ी के गोल घेरे पर दोनों ओर खाल; मांगलिकसरगड़ा, ढोली; जालोर का ढोल नृत्य (थाकना शैली)
नगाड़ालोहे की कटोरी पर भैंस की खाल; दो डंडों सेमंदिर, नौटंकी, गींदड़ नृत्य
नौबतधातु की बड़ी कुंडी पर खाल; मंदिरों मेंमंदिरों में नौबत बजाने वाले नौबतखाने
दमामा (टामक)सबसे बड़ा नगाड़ा; युद्ध मेंरणक्षेत्र, दुर्ग
चंग (ढप)लकड़ी के गोल घेरे पर बकरे की खालशेखावाटी में होली पर
खंजरीछोटी ढपली; लकड़ी का घेराकालबेलिया, नाथ, भील
मांदलमिट्टी का बना, मृदंग जैसा; शिव-पार्वती से संबद्ध माना जाताभील, गरासिया (गवरी, वालर)
डेरूडमरू जैसा पर बड़ा; लकड़ी कागोगाजी के भोपे
धौंसाआम या फरास की लकड़ी का बड़ा नगाड़ादुर्गों व युद्ध में
ढाकडमरू जैसा; पैर के पंजे पर रखकर बजाया जातागुर्जर, भील — पूजा के समय
मृदंग (पखावज)लकड़ी का; दोनों ओर खालरावल व भवाई नाट्य, मंदिर
तासातांबे/लोहे की परात पर खालमुस्लिम समाज, ताजिये के जुलूस

घन वाद्य (धातु के)

🥁 मंजीरा

पीतल-कांसे की दो गोलाकार कटोरियां। कामड़ जाति की महिलाएं तेरहताली नृत्य में शरीर पर 13 मंजीरे बांधती हैं।

🪵 खड़ताल

लकड़ी के टुकड़ों के बीच पीतल की छोटी तश्तरियां। प्रसिद्ध वादक सद्दीक खां मांगणियार — "खड़ताल का जादूगर"।

🔔 झांझ

मंजीरे का बड़ा रूप; शेखावाटी में कच्छी घोड़ी नृत्य के साथ।

🎊 श्रीमंडल

चांदी या पीतल की छोटी घंटियों का बैंड जैसा वाद्य; विवाह व उत्सवों पर बजाया जाता है।

🦶 रमझोल

चमड़े की पट्टी पर घुंघरू; नृत्य के समय पैरों में बांधे जाते हैं।

🍽️ थाली

कांसे की थाली को लकड़ी से बजाया जाता है; भवाई व चरी नृत्य, पुत्र जन्म पर।

🛕 झालर

कांसे की गोल प्लेट; मंदिरों में आरती के समय।

🏺 भरनी

मिट्टी का मटका, कांसे की प्लेट से ढका; भरतपुर-अलवर में सर्पदंश के उपचार के समय लोक देवताओं के गीतों के साथ।

वाद्य व प्रसिद्ध कलाकार

कलाकारवाद्यविशेष
साकर खां मांगणियारकमायचापद्मश्री (2012)
लाखा खांसिंधी सारंगीपद्मश्री (2021)
सद्दीक खां मांगणियारखड़ताल"खड़ताल का जादूगर"
जहूर खां मेवातीभपंगअलवर-मेवात
करणा भीलनड़मूंछें गिनीज़ बुक में
पं. विश्वमोहन भट्टमोहन वीणाग्रैमी पुरस्कार (1994), पद्म भूषण; जयपुर

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) रावणहत्था — भोपों का वाद्य (पाबूजी की फड़ बांचते समय)। (2) कामायचा — मांगणियार; सिंधी सारंगी — लंगा। (3) चमड़े से मढ़े वाद्य — अवनद्ध (ताल); तार वाले — तंत; फूंक वाले — सुषिर।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. तत वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ — सारंगी (27 तार)।
  2. पाबूजी की फड़ के साथ — रावणहत्था; देवनारायण की फड़ के साथ — जंतर।
  3. मांगणियारों का प्रमुख वाद्य — कमायचा।
  4. अलवर-मेवात का जोगियों का वाद्य — भपंग (जहूर खां मेवाती)।
  5. "खड़ताल का जादूगर" — सद्दीक खां मांगणियार।
  6. नड़ वादक — करणा भील (जैसलमेर)।
  7. भैरूजी के भोपों का वाद्य — मशक।
  8. गोगाजी के भोपों का वाद्य — डेरू।
  9. सबसे बड़ा नगाड़ा — दमामा (टामक)।
  10. कामड़ जाति — तंदूरा व मंजीरा।
  11. मोहन वीणा के आविष्कारक — पं. विश्वमोहन भट्ट।
  12. बांसुरी की जोड़ी — अलगोजा।
  13. शहनाई जैसा मरुस्थलीय वाद्य — सतारा / पूंगी (कालबेलिया)।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 पाबूजी की फड़ बांचते समय कौनसा वाद्य बजाया जाता है?

2 कमायचा मुख्यतः किस जाति द्वारा बजाया जाता है?

3 जहूर खां मेवाती किस वाद्य के वादक हैं?

4 "खड़ताल का जादूगर" किसे कहा जाता है?

5 दो बांसुरियों को एक साथ बजाया जाने वाला वाद्य कौनसा है?

6 भैरूजी के भोपे कौनसा वाद्य बजाते हैं?

7 जंतर वाद्य किसकी फड़ के साथ बजता है?

8 नड़ वाद्य बनाने में किस वृक्ष की लकड़ी का प्रयोग होता है?

9 मांदल वाद्य मुख्यतः किससे बनता है?

10 मोहन वीणा के आविष्कारक कौन हैं?

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