राजस्थान का लोक संगीत

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राजस्थान का लोक संगीत यहां के जनजीवन, ऋतुओं, त्योहारों और संस्कारों से गहराई से जुड़ा है। जन्म से लेकर विवाह और मृत्यु तक हर अवसर के अपने लोक गीत हैं। मांड गायन शैली और लंगा-मांगणियार जैसी गायक जातियों ने राजस्थानी संगीत को विश्व मंच तक पहुंचाया है।

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मांड
शास्त्रीय लोक गायन शैली
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केसरिया बालम
राज्य गीत
🪕
लंगा-मांगणियार
व्यावसायिक गायक जातियां
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उदयपुर
भारतीय लोक कला मंडल
📑 विषय सूची 7 टॉपिक

लोक गीत

राजस्थानी लोक गीतों को तीन वर्गों में बांटा जाता है — (1) जन सामान्य के गीत (संस्कार, ऋतु, त्योहार), (2) व्यावसायिक जातियों के गीत (लंगा, मांगणियार, ढाढ़ी) और (3) क्षेत्रीय गीत।

लोक गीतविषय / अवसर
केसरिया बालमराज्य गीत; मांड शैली में प्रियतम के स्वागत/प्रतीक्षा का गीत
घूमरगणगौर व तीज पर घूमर नृत्य के साथ
पणिहारीपानी भरने जाती स्त्री — पतिव्रत धर्म का वर्णन
कुरजांविरहिणी स्त्री कुरजां पक्षी के माध्यम से परदेस गए पति को संदेश भेजती है
मोरियासगाई हो चुकी पर विवाह न हुई युवती की प्रतीक्षा
पीपलीमारवाड़-शेखावाटी में वर्षा ऋतु का विरह गीत (तीज पर)
ओल्यूंकिसी की याद में — विशेषकर बेटी की विदाई पर
हिचकीमेवात (अलवर) — प्रियतम की याद आने पर
झोरावाजैसलमेर क्षेत्र — पति के परदेस जाने पर विरह
मूमलजैसलमेर — लोद्रवा की राजकुमारी मूमल का सौंदर्य वर्णन (श्रृंगार गीत)
गोरबंदऊंट के गले का आभूषण — मरुस्थल का श्रृंगारिक गीत
इंडोणीपानी भरने के लिए सिर पर रखी जाने वाली इंडोणी पर गीत
बधावाशुभ कार्य पूर्ण होने पर
कामणदूल्हे को जादू-टोने से बचाने हेतु विवाह पर
सीठणेविवाह पर हंसी-मज़ाक भरी गालियां (गाली गीत)
जलो-जलालबारात के समय वधू पक्ष की स्त्रियां गाती हैं
हरजससगुण भक्ति के गीत, मृत्यु के अवसर पर भी
लांगुरियाकैला देवी (करौली) की आराधना
हमसीढ़ोभील स्त्री-पुरुष का युगल गीत
सुवटियाभील स्त्री द्वारा परदेस गए पति को तोते के माध्यम से संदेश
पावणादामाद के ससुराल आने पर
तेजा टेरकिसानों द्वारा खेती शुरू करते समय तेजाजी का गीत

प्रमुख गायन शैलियां

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मांड गायकी

राजस्थान की सर्वाधिक प्रसिद्ध शास्त्रीय-लोक गायन शैली

अति महत्वपूर्ण
  • प्राचीन काल में जैसलमेर क्षेत्र को "माड" कहा जाता था; यहां विकसित गायन शैली मांड कहलाई।
  • प्रसिद्ध गीत "केसरिया बालम आवो नी, पधारो म्हारे देस" इसी शैली में है।
  • अल्लाह जिलाई बाई (बीकानेर) — "मांड गायिका"; 1982 में पद्मश्री।
  • गवरी देवी (जोधपुर), मांगी बाई (उदयपुर), जमीला बानो (जोधपुर) अन्य प्रमुख मांड गायिकाएं।

🎼 हवेली संगीत

पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय के मंदिरों (नाथद्वारा) में कृष्ण भक्ति हेतु गाया जाने वाला संगीत; धमार व ध्रुपद पर आधारित।

🎙️ जयपुर घराना

ख्याल गायकी का प्रसिद्ध घराना; संस्थापक उस्ताद अल्लादिया खां। (जयपुर-अतरौली घराना)

🎵 डागर घराना

ध्रुपद गायन का प्रसिद्ध घराना; बहराम खां डागर से संबंध, जयपुर दरबार से जुड़ा।

📯 तालबंदी

पूर्वी राजस्थान (भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर) की शैली; लोक वाद्यों के साथ राग-रागिनियों में गायन।

व्यावसायिक लोक गायक जातियां

जातिक्षेत्रप्रमुख वाद्य / विशेषता
लंगाबाड़मेर, जैसलमेरसारंगी, कमायचा; यजमान — सिंधी मुसलमान
मांगणियारबाड़मेर, जैसलमेरकमायचा, खड़ताल; यजमान — राजपूत; 6 राग व 36 रागिनियां
ढाढ़ीमारवाड़राजपूतों की वंशावली व यशगान
मिरासीमारवाड़सारंगी; यजमानों के यशगान
कलावंतजयपुर, अलवरदरबारी शास्त्रीय गायक
भाट / रावसम्पूर्ण राज्यवंशावली लेखन व वाचन
कालबेलियामारवाड़पूंगी (बीन); सपेरा जाति
💡 प्रसिद्ध कलाकार: साकर खां मांगणियार (कमायचा वादक, पद्मश्री), अनवर खां मांगणियार (पद्मश्री), मामे खां, लाखा खां (सिंधी सारंगी, पद्मश्री)।

संगीत-नृत्य के प्रमुख संस्थान

राजस्थान संगीत नाटक अकादमीजोधपुर (1957)
भारतीय लोक कला मंडलउदयपुर (1952, देवीलाल सामर)
जवाहर कला केंद्रजयपुर (1993)
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्रउदयपुर (बागोर की हवेली)
रूपायन संस्थानबोरूंदा (जोधपुर) — कोमल कोठारी
राजस्थान कथक केंद्रजयपुर

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) केसरिया बालम — राज्य गीत, मांड शैली। (2) लंगा — सिंधी मुसलमान यजमान; मांगणियार — राजपूत यजमान। (3) पानी भरती स्त्री का गीत — पणिहारी; विरह संदेश — कुरजां।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. राजस्थान का राज्य गीत — केसरिया बालम (मांड शैली)।
  2. "मांड गायिका" अल्लाह जिलाई बाई — बीकानेर; पद्मश्री 1982।
  3. पानी भरने जाती स्त्री का गीत — पणिहारी।
  4. पक्षी के माध्यम से परदेसी पति को संदेश — कुरजां; भील स्त्री का तोते से संदेश — सुवटिया।
  5. मेवात का विरह गीत — हिचकी; जैसलमेर का विरह गीत — झोरावा।
  6. लोद्रवा की राजकुमारी का सौंदर्य वर्णन — मूमल।
  7. कैला देवी (करौली) की आराधना — लांगुरिया।
  8. खेती शुरू करते समय किसानों का गीत — तेजा टेर।
  9. लंगा — सिंधी मुसलमान यजमान; मांगणियार — राजपूत यजमान।
  10. भारतीय लोक कला मंडल — उदयपुर (देवीलाल सामर)।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 "केसरिया बालम" गीत किस गायन शैली से संबंधित है?

2 "मांड गायिका" अल्लाह जिलाई बाई किस शहर से थीं?

3 पानी भरने जाती स्त्री से संबंधित लोक गीत कौन-सा है?

4 विरहिणी स्त्री किस पक्षी के माध्यम से परदेस गए पति को संदेश भेजती है?

5 "हिचकी" लोक गीत किस क्षेत्र से संबंधित है?

6 कैला देवी की आराधना में कौन-सा गीत गाया जाता है?

7 विवाह पर गाए जाने वाले गाली गीत क्या कहलाते हैं?

8 खेती शुरू करते समय किसान कौन-सा गीत गाते हैं?

9 मांगणियार गायकों के यजमान कौन होते हैं?

10 भारतीय लोक कला मंडल की स्थापना किसने की?

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