राजस्थान की प्रमुख छतरियां
राजस्थान में राजाओं, रानियों, सामंतों और महापुरुषों की स्मृति में उनके दाह-संस्कार स्थल पर गुंबदनुमा छतरियां बनाने की परंपरा रही है। हर राजवंश का अपना शाही छतरी स्थल है और कई छतरियां अपने खंभों की संख्या से पहचानी जाती हैं।
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छतरी स्थापत्य: परिचय
- छतरी किसी राजा, रानी, सामंत या महापुरुष की स्मृति में उनके दाह-संस्कार स्थल पर बनाई जाने वाली गुंबदनुमा संरचना है।
- छतरियां खंभों की संख्या (6, 8, 16, 32, 84 आदि) के आधार पर पहचानी जाती हैं।
- मारवाड़ में राजाओं की स्मृति में बने ऐसे स्मारक "देवल" भी कहलाते हैं (मंडोर)।
- राजवंशों के शाही श्मशान स्थल अलग-अलग नामों से जाने जाते हैं — गैटोर, बड़ा बाग, देवीकुंड, आहड़, केसर बाग, क्षार बाग।
राजवंशों के शाही छतरी स्थल
किस राजवंश की छतरियां कहां हैं
जसवंत थड़ा (जोधपुर)
मारवाड़ का ताजमहल
- महाराजा सरदारसिंह ने अपने पिता जसवंतसिंह द्वितीय की स्मृति में 1906 ई. में बनवाया।
- सफेद संगमरमर से निर्मित; सूर्य की रोशनी में चमकने के कारण इसे "मारवाड़ का ताजमहल" कहते हैं।
- मेहरानगढ़ दुर्ग के पास स्थित है; यहां जोधपुर के बाद के राजाओं की छतरियां भी हैं।
महाराणा प्रताप की छतरी
बांडोली · 8 खंभों की छतरी
- महाराणा प्रताप का निधन 19 जनवरी 1597 को चावंड में हुआ।
- उनकी 8 खंभों की छतरी चावंड के पास बांडोली गांव में केजड़ बांध के किनारे है — यह क्षेत्र अब सलूंबर जिले में आता है।
खंभों की संख्या वाली प्रसिद्ध छतरियां
| छतरी | खंभे | स्थान | किसकी स्मृति में |
|---|---|---|---|
| चौरासी खंभों की छतरी | 84 | बूंदी | राव अनिरुद्ध सिंह ने धाय भाई देवा की स्मृति में (1683) |
| जगन्नाथ कछवाहा की छतरी | 32 | मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) | मानसिंह के भाई जगन्नाथ कछवाहा |
| अमरसिंह राठौड़ की छतरी | 16 | नागौर (झड़ा तालाब) | वीर अमरसिंह राठौड़ |
| महाराणा प्रताप की छतरी | 8 | बांडोली (सलूंबर) | महाराणा प्रताप |
अन्य प्रमुख छतरियां
🌳 मूसी महारानी की छतरी
अलवर — महाराजा विनयसिंह ने अपने पिता बख्तावरसिंह व रानी मूसी की स्मृति में बनवाई। ऊपरी भाग संगमरमर का, निचला लाल पत्थर का; भीतर रामायण-महाभारत के चित्र।
🏜️ बड़ा बाग (जैसलमेर)
महारावल जैतसिंह द्वारा बनवाए बांध व बाग के पास भाटी शासकों की कलात्मक छतरियां; पीले पत्थर से निर्मित।
👑 गैटोर (जयपुर)
नाहरगढ़ की तलहटी में सवाई जयसिंह द्वितीय सहित जयपुर के कछवाहा राजाओं की छतरियां। सबसे भव्य छतरी जयसिंह द्वितीय की (संगमरमर)।
🏞️ देवीकुंड सागर (बीकानेर)
बीकानेर के राठौड़ राजाओं व रानियों की कलात्मक छतरियां; पास में देवीकुंड नामक जलाशय।
🛕 मंडोर (जोधपुर)
मारवाड़ के राठौड़ शासकों के देवल; महाराजा अजीतसिंह का देवल सबसे भव्य। यहीं "वीरों की दालान" व "तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं की साल" भी हैं।
🕊️ आहड़ (उदयपुर)
मेवाड़ के महाराणाओं का दाह-स्थल "महासतियां"; यहां लगभग 19 छतरियां हैं, जिनमें सबसे पहली महाराणा अमरसिंह प्रथम की है।
🪷 केसर बाग व क्षार बाग
केसर बाग (बूंदी) में बूंदी के हाड़ा राजाओं और क्षार बाग (कोटा) में कोटा के हाड़ा राजाओं की छतरियां हैं।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) जसवंत थड़ा — सरदारसिंह ने बनवाया (पिता जसवंतसिंह द्वितीय की स्मृति में) — जसवंतसिंह ने नहीं। (2) 84 खंभों की छतरी (बूंदी) — धाय भाई देवा की स्मृति में। (3) गैटोर — जयपुर; बड़ा बाग — जैसलमेर; देवीकुंड — बीकानेर; क्षार बाग — कोटा।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- "मारवाड़ का ताजमहल" — जसवंत थड़ा (1906, महाराजा सरदारसिंह)।
- 84 खंभों की छतरी — बूंदी (राव अनिरुद्ध सिंह, धाय भाई देवा की स्मृति में)।
- 32 खंभों की छतरी — मांडलगढ़ (जगन्नाथ कछवाहा); 16 खंभों की — नागौर।
- महाराणा प्रताप की 8 खंभों की छतरी — बांडोली (सलूंबर), केजड़ बांध के किनारे।
- जयपुर राजाओं की छतरियां — गैटोर; रानियों की — महारानी की छतरी।
- जैसलमेर के भाटी — बड़ा बाग; बीकानेर के राठौड़ — देवीकुंड सागर।
- जोधपुर के राठौड़ — मंडोर (देवल); मेवाड़ के महाराणा — आहड़ (महासतियां)।
- बूंदी के हाड़ा — केसर बाग; कोटा के हाड़ा — क्षार बाग।
- मूसी महारानी की छतरी — अलवर।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 जसवंत थड़ा का निर्माण किसने करवाया?
2 "मारवाड़ का ताजमहल" किसे कहा जाता है?
3 84 खंभों की छतरी कहां स्थित है?
4 महाराणा प्रताप की छतरी बांडोली वर्तमान में किस जिले में है?
5 जयपुर के कछवाहा राजाओं की छतरियां कहां हैं?
6 जैसलमेर के भाटी शासकों की छतरियां कहां हैं?
7 बीकानेर के राठौड़ शासकों की छतरियां कहां हैं?
8 मेवाड़ के महाराणाओं का शाही श्मशान स्थल कौन-सा है?
9 कोटा के हाड़ा शासकों की छतरियां कहां हैं?
10 मूसी महारानी की छतरी किस शहर में है?