राजस्थान के प्रमुख युद्ध

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राजस्थान का इतिहास युद्धों और बलिदानों का इतिहास है। तराइन से लेकर हल्दीघाटी और दिवेर तक, यहां के शासकों ने तुर्कों, मुगलों और पड़ोसी राज्यों के विरुद्ध अनेक निर्णायक युद्ध लड़े। परीक्षा में युद्ध का वर्ष, स्थान, पक्ष और परिणाम सबसे अधिक पूछे जाते हैं।

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1192
तराइन का द्वितीय युद्ध
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1527
खानवा — तोपखाने का प्रयोग
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18 जून 1576
हल्दीघाटी
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1582
दिवेर — मेवाड़ का मैराथन
📑 विषय सूची 12 टॉपिक

तुर्क आक्रमण काल के युद्ध

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तराइन के युद्ध

पृथ्वीराज चौहान तृतीय बनाम मुहम्मद गौरी

अति महत्वपूर्ण
प्रथम युद्ध1191 ई. — पृथ्वीराज विजयी
द्वितीय युद्ध1192 ई. — गौरी विजयी
स्थानतराइन (हरियाणा, करनाल के पास)
  • प्रथम युद्ध में दिल्ली के गवर्नर गोविंदराज (गोविंदराय तोमर) ने गौरी को घायल किया।
  • द्वितीय युद्ध की पराजय से भारत में तुर्क शासन की नींव पड़ी; पृथ्वीराज बंदी बनाए गए।
युद्ध / आक्रमणवर्षपक्षपरिणाम
रणथंभौर1301हम्मीर देव चौहान vs अलाउद्दीन खिलजीराजस्थान का प्रथम साका; रंगदेवी का जौहर
चित्तौड़1303रावल रतनसिंह vs अलाउद्दीन खिलजीपद्मिनी का जौहर; खिज्राबाद नाम
सिवाणा1308सातलदेव vs अलाउद्दीन खिलजीसाका; नाम खैराबाद
जालोर1311-12कान्हड़देव vs अलाउद्दीन खिलजीसाका; नाम जलालाबाद
सिंगोली14वीं सदीमहाराणा हम्मीर vs मुहम्मद बिन तुगलकहम्मीर विजयी
गागरोन1423अचलदास खींची vs होशंगशाह (मालवा)प्रथम साका
सारंगपुर1437महाराणा कुंभा vs महमूद खिलजी (मालवा)कुंभा विजयी; विजय स्तंभ बना

राणा सांगा के युद्ध

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खानवा का युद्ध

17 मार्च 1527 · राणा सांगा बनाम बाबर

अति महत्वपूर्ण
स्थानखानवा, रूपवास (भरतपुर)
परिणामबाबर विजयी
पूर्व युद्धबयाना (16 फरवरी 1527) — सांगा विजयी
  • बाबर ने तोपखाने और "तुलुगमा" युद्ध पद्धति का प्रयोग किया; युद्ध को "जिहाद" घोषित किया, शराब न पीने की शपथ ली और विजय के बाद "गाज़ी" की उपाधि धारण की।
  • सांगा के पक्ष में कई राजपूत शासक व महमूद लोदी, हसन खां मेवाती थे — सांगा ने "पाती परवन" परंपरा से राजाओं को आमंत्रित किया।
  • घायल सांगा को युद्धभूमि से बाहर ले जाया गया; झाला अज्जा ने राजचिह्न धारण कर युद्ध जारी रखा।
  • इस युद्ध के बाद भारत में मुगल साम्राज्य की नींव मज़बूत हुई।
युद्धवर्षपक्षविजेता
खातोली (बूंदी/कोटा क्षेत्र)1517सांगा vs इब्राहिम लोदीसांगा
बाड़ी (धौलपुर)1518सांगा vs इब्राहिम लोदीसांगा
गागरोन1519सांगा vs महमूद खिलजी द्वितीयसांगा
बयाना (भरतपुर)1527सांगा vs बाबर की सेनासांगा
खानवा (भरतपुर)1527सांगा vs बाबरबाबर

मारवाड़ के युद्ध

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गिरि-सुमेल का युद्ध

जनवरी 1544 · राव मालदेव बनाम शेरशाह सूरी

अति महत्वपूर्ण
  • स्थान — गिरि व सुमेल गांव, जैतारण के पास।
  • शेरशाह ने जाली पत्रों से मालदेव के मन में अपने सरदारों के प्रति संदेह पैदा कर दिया; मालदेव युद्ध से पहले लौट गए।
  • सेनापति जैता व कूंपा ने थोड़ी सेना के साथ वीरता से लड़कर प्राण दिए।
  • कठिन विजय के बाद शेरशाह ने कहा — "मैं मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की बादशाहत खो देता।"

⚔️ पाहेबा (साहेबा) युद्ध — 1541

जोधपुर के मालदेव ने बीकानेर के राव जैतसी को हराया; जैतसी मारे गए।

🏹 धरमत युद्ध — 1658

उज्जैन (मध्य प्रदेश) के पास; मुगल उत्तराधिकार संघर्ष में दारा की ओर से जसवंतसिंह प्रथम ने औरंगजेब-मुराद की सेना से युद्ध किया; औरंगजेब विजयी।

🛡️ दत्ताणी युद्ध — 1583

सिरोही के राव सुरताण ने अकबर की सेना को हराया।

हल्दीघाटी एवं दिवेर

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हल्दीघाटी का युद्ध

18 जून 1576 · महाराणा प्रताप बनाम मुगल सेना (मानसिंह)

अति महत्वपूर्ण
स्थानहल्दीघाटी, खमनोर के पास (राजसमंद)
मुगल सेनापतिमानसिंह (कछवाहा), आसफ खां
प्रताप के सेनापतिहकीम खां सूर (हरावल)
प्रत्यक्षदर्शीअब्दुल कादिर बदायूंनी
परिणामअनिर्णीत; अकबर का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ
  • अन्य नाम: खमनोर का युद्ध (अबुल फज़ल), गोगुंदा का युद्ध (बदायूंनी), "मेवाड़ की थर्मोपल्ली" (कर्नल टॉड)।
  • प्रताप का घोड़ा चेतक घायल होकर भी प्रताप को सुरक्षित निकाल ले गया; बलीचा गांव में चेतक की छतरी है।
  • झाला मान (बीदा) ने राजचिह्न धारण कर प्रताप की जगह युद्ध किया और बलिदान दिया।
  • युद्ध के बाद रक्त से भरा मैदान "रक्त तलाई" कहलाया। प्रताप का हाथी रामप्रसाद मुगलों ने पकड़ा और उसका नाम "पीरप्रसाद" रखा।
  • प्रताप की सेना में भील सरदार राणा पूंजा व हकीम खां सूर; युद्ध के बाद भामाशाह ने आर्थिक सहायता दी।
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दिवेर का युद्ध

अक्टूबर 1582 · मेवाड़ का मैराथन

महत्वपूर्ण
  • स्थान — दिवेर (राजसमंद); महाराणा प्रताप ने मुगल चौकियों पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की।
  • कुंवर अमरसिंह ने मुगल सेनापति सुल्तान खां को भाले से मारा।
  • कर्नल टॉड ने इसे "मेवाड़ का मैराथन" कहा; इसके बाद प्रताप ने चित्तौड़ व मांडलगढ़ को छोड़कर अधिकांश मेवाड़ वापस जीत लिया और चावंड को राजधानी बनाया।

18वीं सदी के युद्ध

युद्धवर्षपक्षपरिणाम
गंगवाना1741सवाई जयसिंह vs अभयसिंह व बख्तसिंह (जोधपुर)जयसिंह विजयी
राजमहल (टोंक)1747ईश्वरीसिंह vs माधोसिंह व सहयोगीईश्वरीसिंह विजयी; ईसरलाट बनवाई
बगरू (जयपुर)1748ईश्वरीसिंह vs माधोसिंह व मराठाईश्वरीसिंह पराजित
तूंगा (जयपुर)1787जयपुर-जोधपुर vs महादजी सिंधियाराजपूत विजयी
पाटन (सीकर)1790जयपुर-जोधपुर vs सिंधियासिंधिया विजयी
मेड़ता1790जोधपुर vs सिंधियासिंधिया विजयी

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) तराइन प्रथम 1191 (पृथ्वीराज जीते), द्वितीय 1192 (हारे)। (2) खानवा — 17 मार्च 1527, रूपवास (भरतपुर)। (3) हल्दीघाटी — 18 जून 1576; टॉड ने कहा “मेवाड़ की थर्मोपल्ली”।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. तराइन प्रथम — 1191 (पृथ्वीराज विजयी); द्वितीय — 1192 (गौरी विजयी)।
  2. सारंगपुर — 1437, कुंभा vs महमूद खिलजी।
  3. बयाना — 16 फरवरी 1527 (सांगा विजयी); खानवा — 17 मार्च 1527 (बाबर विजयी)।
  4. बाबर की युद्ध पद्धति — तुलुगमा; उपाधि — गाज़ी।
  5. "मुट्ठी भर बाजरे" — शेरशाह, गिरि-सुमेल (1544); जैता-कूंपा।
  6. हल्दीघाटी — 18 जून 1576; "मेवाड़ की थर्मोपल्ली" (टॉड)।
  7. हल्दीघाटी के प्रत्यक्षदर्शी — बदायूंनी; हरावल — हकीम खां सूर।
  8. दिवेर (1582) — "मेवाड़ का मैराथन"; सुल्तान खां को अमरसिंह ने मारा।
  9. धरमत (1658) — जसवंतसिंह vs औरंगजेब।
  10. राजमहल (1747) विजय स्मारक — ईसरलाट (सरगासूली)।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 तराइन का प्रथम युद्ध कब हुआ?

2 खानवा का युद्ध किनके बीच हुआ?

3 "मैं मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की बादशाहत खो देता" — यह किसने कहा?

4 हल्दीघाटी युद्ध की तिथि क्या है?

5 "मेवाड़ की थर्मोपल्ली" किस युद्ध को कहा गया?

6 "मेवाड़ का मैराथन" किस युद्ध को कहा गया?

7 हल्दीघाटी युद्ध में प्रताप की सेना के हरावल का नेतृत्व किसने किया?

8 सारंगपुर युद्ध में कुंभा ने किसे हराया?

9 खानवा का युद्धस्थल वर्तमान में किस जिले में है?

10 राजमहल युद्ध (1747) में विजय के बाद ईश्वरीसिंह ने क्या बनवाया?

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