राजस्थान में नगरीय स्वशासन
नगरीय स्वशासन शहरों व कस्बों के स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था है, जिसके माध्यम से नागरिक अपने प्रतिनिधियों द्वारा सफाई, पेयजल, सड़क, प्रकाश जैसी नागरिक सुविधाओं का प्रबंधन करते हैं। 74वें संविधान संशोधन (1992) ने नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया। राजस्थान में ये निकाय राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के अंतर्गत कार्य करते हैं।
📑 विषय सूची 6 टॉपिक
विकास क्रम
- राजस्थान में प्रथम नगरपालिका — माउंट आबू (1864); इसके बाद अजमेर व अन्य शहरों में।
- स्वतंत्रता के बाद राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 1959 लागू हुआ।
- 74वां संविधान संशोधन (1992) — 1 जून 1993 से लागू; भाग 9A, अनुच्छेद 243P से 243ZG; 12वीं अनुसूची में 18 विषय।
- वर्तमान में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 लागू है, जिसने 1959 के अधिनियम का स्थान लिया।
नगरीय निकायों के प्रकार
| निकाय | क्षेत्र | निर्वाचित प्रमुख | प्रशासनिक अधिकारी |
|---|---|---|---|
| नगर निगम | बड़े शहर (5 लाख से अधिक जनसंख्या) | महापौर (मेयर) | आयुक्त |
| नगर परिषद | मध्यम शहर (1 से 5 लाख) | सभापति | आयुक्त |
| नगर पालिका | छोटे शहर/कस्बे (1 लाख से कम) | अध्यक्ष | अधिशासी अधिकारी (EO) |
- प्रमुख नगर निगम — जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, भरतपुर।
- नगरीय निकायों के सदस्य पार्षद कहलाते हैं, जो वार्डों से प्रत्यक्ष चुने जाते हैं।
- कार्यकाल — 5 वर्ष (अनु. 243U); चुनाव — राज्य निर्वाचन आयोग (अनु. 243ZA)।
- राज्य सरकार कुछ विशेषज्ञ सदस्यों को मनोनीत भी कर सकती है, जिन्हें मत देने का अधिकार नहीं होता।
74वें संशोधन के प्रमुख प्रावधान
🔖 आरक्षण (243T)
SC/ST को जनसंख्या के अनुपात में; महिलाओं को न्यूनतम 1/3 — राजस्थान में 50%।
🏘️ वार्ड समितियां (243S)
3 लाख या अधिक जनसंख्या वाले निकायों में वार्ड समितियां।
💰 वित्त आयोग (243Y)
राज्य वित्त आयोग नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति की भी समीक्षा करता है।
🗺️ जिला योजना समिति (243ZD)
पंचायतों व नगरीय निकायों की योजनाओं को मिलाकर जिला विकास योजना।
🏙️ महानगर योजना समिति (243ZE)
10 लाख या अधिक जनसंख्या वाले महानगरीय क्षेत्रों के लिए।
📋 12वीं अनुसूची
18 विषय — नगर नियोजन, पेयजल, सफाई, सड़कें, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, अग्निशमन आदि।
विकास प्राधिकरण व अन्य संस्थाएं
| संस्था | स्थापना / विशेष |
|---|---|
| जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) | 1982 — राज्य का प्रथम विकास प्राधिकरण |
| जोधपुर विकास प्राधिकरण (JDA) | 2009 |
| अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) | 2013 |
| नगर विकास न्यास (UIT) | अन्य शहरों में शहरी विकास व नियोजन |
| राजस्थान आवासन मंडल | 1970 — आवासीय कॉलोनियों का विकास |
| स्थानीय निकाय विभाग | नगरीय निकायों पर राज्य सरकार का नियंत्रण व मार्गदर्शन |
📝 नगर निगम का आयुक्त सामान्यतः IAS/RAS अधिकारी होता है, जबकि नगर पालिका का प्रशासनिक प्रमुख अधिशासी अधिकारी होता है। ग्रामीण स्वशासन की जानकारी के लिए पंचायती राज पेज देखें।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) 74वां संशोधन — 12वीं अनुसूची (18 विषय); 73वां — 11वीं अनुसूची (29 विषय)। (2) नगर निगम — महापौर; नगर परिषद — सभापति; नगर पालिका — अध्यक्ष। (3) राजस्थान की प्रथम नगरपालिका — माउंट आबू (1864)।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा — 74वां संशोधन (1992), लागू 1 जून 1993।
- संविधान का भाग — 9A; अनुच्छेद — 243P-243ZG।
- 12वीं अनुसूची — 18 विषय।
- राजस्थान की प्रथम नगरपालिका — माउंट आबू (1864)।
- वर्तमान कानून — राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009।
- नगर निगम — महापौर; नगर परिषद — सभापति; नगर पालिका — अध्यक्ष।
- महिला आरक्षण — 50%।
- प्रथम विकास प्राधिकरण — जयपुर (1982)।
- राजस्थान आवासन मंडल — 1970।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन से मिला?
2 संविधान की 12वीं अनुसूची में कितने विषय हैं?
3 नगरीय निकायों से संबंधित प्रावधान संविधान के किस भाग में हैं?
4 राजस्थान की प्रथम नगरपालिका कौन-सी थी?
5 राजस्थान में वर्तमान में कौन-सा नगरपालिका अधिनियम लागू है?
6 नगर परिषद का निर्वाचित प्रमुख क्या कहलाता है?
7 नगर पालिका का प्रशासनिक अधिकारी कौन होता है?
8 राजस्थान का प्रथम विकास प्राधिकरण कौन-सा है?
9 नगरीय निकायों के चुनाव कौन कराता है?
10 राजस्थान आवासन मंडल की स्थापना कब हुई?