राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग
राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग (RSHRC) एक वैधानिक (सांविधिक) संस्था है, जिसका गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत हुआ। यह राज्य में मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच करता है और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सरकार को सिफारिशें देता है। आयोग का मुख्यालय जयपुर में है।
📑 विषय सूची 9 टॉपिक
मानवाधिकार की अवधारणा
- मानवाधिकार वे मूल अधिकार हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को मनुष्य होने के नाते प्राप्त हैं — जीवन, स्वतंत्रता, समानता व गरिमा का अधिकार।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसंबर 1948 को मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) स्वीकार की — इसलिए 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है।
- मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 2(d) के अनुसार मानवाधिकार — संविधान द्वारा प्रत्याभूत या अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में शामिल व भारतीय न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय, जीवन, स्वतंत्रता, समानता व गरिमा से संबंधित अधिकार।
स्थापना
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का गठन 12 अक्टूबर 1993 को हुआ; इसी अधिनियम की धारा 21 के तहत राज्यों में राज्य मानवाधिकार आयोग बनाए जाते हैं।
- राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग की अधिसूचना 18 जनवरी 1999 को जारी हुई; आयोग ने मार्च 2000 से कार्य प्रारंभ किया।
- प्रथम अध्यक्ष — न्यायमूर्ति कांता कुमारी भटनागर (मद्रास उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश)।
📝 मानवाधिकार आयोग संवैधानिक नहीं, बल्कि संसद के कानून से बना वैधानिक निकाय है। इसकी सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं हैं, पर सरकार को एक माह में की गई कार्रवाई की जानकारी देनी होती है।
गठन, नियुक्ति व कार्यकाल
| विषय | प्रावधान |
|---|---|
| संरचना | एक अध्यक्ष व दो सदस्य |
| अध्यक्ष की योग्यता | उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश (2019 संशोधन से) |
| सदस्य | एक — उच्च न्यायालय/जिला न्यायाधीश (अनुभव सहित); दूसरा — मानवाधिकार का ज्ञान/अनुभव रखने वाला (महिला को प्राथमिकता) |
| नियुक्ति | राज्यपाल द्वारा, एक समिति की सिफारिश पर |
| नियुक्ति समिति | मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा अध्यक्ष, गृह मंत्री, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष |
| कार्यकाल | 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो पहले हो); पुनर्नियुक्ति संभव |
| हटाना | राष्ट्रपति द्वारा (सिद्ध कदाचार/अक्षमता पर सर्वोच्च न्यायालय की जांच के बाद) |
| त्यागपत्र | राज्यपाल को |
शक्तियां व कार्य
🔍 जांच
मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत या स्वतः संज्ञान लेकर जांच; लोक सेवक की लापरवाही की जांच।
⚖️ सिविल न्यायालय की शक्तियां
गवाहों को बुलाना, शपथ पर बयान, दस्तावेज़ मंगाना — सिविल प्रक्रिया संहिता के अनुसार।
🏢 निरीक्षण
जेलों, बाल सुधार गृहों व अन्य सरकारी संस्थाओं में बंदियों की स्थिति का निरीक्षण।
💸 मुआवज़ा सिफारिश
पीड़ित को अंतरिम राहत/मुआवज़ा देने व दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश।
📚 जागरूकता
मानवाधिकार साक्षरता का प्रसार व शोध को बढ़ावा।
📄 प्रतिवेदन
वार्षिक प्रतिवेदन राज्य सरकार को; सरकार इसे विधानसभा में रखती है।
- आयोग घटना के एक वर्ष बाद की शिकायत पर विचार नहीं करता।
- जो मामला किसी अन्य आयोग या न्यायालय में विचाराधीन है, उस पर आयोग जांच नहीं करता।
- सशस्त्र बलों से संबंधित मामलों में राज्य आयोग का क्षेत्राधिकार नहीं।
राष्ट्रीय व राज्य मानवाधिकार आयोग — तुलना
| आधार | राष्ट्रीय आयोग (NHRC) | राज्य आयोग (RSHRC) |
|---|---|---|
| गठन | 12 अक्टूबर 1993 | 18 जनवरी 1999 (राजस्थान) |
| अध्यक्ष | सर्वोच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश | उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश |
| नियुक्ति | राष्ट्रपति (प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर) | राज्यपाल (मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर) |
| हटाना | राष्ट्रपति | राष्ट्रपति |
| प्रतिवेदन | केंद्र सरकार को | राज्य सरकार को |
| क्षेत्राधिकार | संघ व राज्य सूची के विषय | केवल राज्य सूची व समवर्ती सूची के विषय |
मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019
- राज्य आयोग के अध्यक्ष के लिए केवल मुख्य न्यायाधीश ही नहीं, बल्कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी पात्र हुए।
- अध्यक्ष व सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष (या 70 वर्ष की आयु) किया गया तथा पुनर्नियुक्ति की अनुमति दी गई।
- राष्ट्रीय आयोग में मानवाधिकार के जानकार सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई और उनमें एक महिला सदस्य का प्रावधान किया गया।
मानवाधिकार न्यायालय
- अधिनियम की धारा 30 के अनुसार राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, प्रत्येक जिले में एक सत्र न्यायालय को मानवाधिकार न्यायालय घोषित कर सकती है।
- इन न्यायालयों में मुकदमों के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किए जाते हैं (धारा 31)।
- उद्देश्य — मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की त्वरित सुनवाई।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल करता है, पर हटा केवल राष्ट्रपति सकता है। (2) आयोग वैधानिक है, संवैधानिक नहीं। (3) 2019 के बाद कार्यकाल — 3 वर्ष (पहले 5 वर्ष)। (4) शिकायत की सीमा — घटना के 1 वर्ष के भीतर।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- राज्य मानवाधिकार आयोग — वैधानिक निकाय (मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993)।
- राजस्थान आयोग का गठन — 18 जनवरी 1999; कार्य प्रारंभ — मार्च 2000।
- प्रथम अध्यक्ष — न्यायमूर्ति कांता कुमारी भटनागर।
- संरचना — अध्यक्ष + 2 सदस्य; मुख्यालय — जयपुर।
- नियुक्ति — राज्यपाल; समिति के अध्यक्ष — मुख्यमंत्री।
- हटाना — राष्ट्रपति द्वारा।
- कार्यकाल — 3 वर्ष या 70 वर्ष (2019 संशोधन)।
- शिकायत की समय सीमा — घटना के 1 वर्ष के भीतर।
- मानवाधिकार दिवस — 10 दिसंबर (UDHR, 1948)।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग — 12 अक्टूबर 1993।
- मानवाधिकार की परिभाषा — धारा 2(d); राज्य आयोग — धारा 21।
- मानवाधिकार न्यायालय — धारा 30; हर जिले का एक सत्र न्यायालय।
- आयोग को जांच में — सिविल न्यायालय की शक्तियां।
- सिफारिश पर सरकार द्वारा कार्रवाई की सूचना — 1 माह में।
- 2019 संशोधन से पुनर्नियुक्ति — संभव।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 राज्य मानवाधिकार आयोग किस अधिनियम के तहत गठित होता है?
2 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन कब हुआ?
3 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग की प्रथम अध्यक्ष कौन थीं?
4 राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है?
5 राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को कौन हटा सकता है?
6 नियुक्ति समिति का अध्यक्ष कौन होता है?
7 2019 संशोधन के बाद आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल कितना है?
8 राज्य मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष के अलावा कितने सदस्य होते हैं?
9 आयोग घटना के कितने समय बाद की शिकायत पर विचार नहीं करता?
10 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का मुख्यालय कहां है?
11 मानवाधिकार दिवस कब मनाया जाता है?
12 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन कब हुआ?
13 मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की किस धारा में मानवाधिकार न्यायालय का प्रावधान है?
14 राज्य मानवाधिकार आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन किसे भेजा जाता है?
15 2019 संशोधन से पहले राज्य आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल कितना था?