आमेर-जयपुर का कछवाहा वंश

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कछवाहा राजवंश ने ढूंढाड़ क्षेत्र (आमेर-जयपुर) पर शासन किया। मुगलों से वैवाहिक व राजनीतिक संबंध बनाकर कछवाहों ने साम्राज्य में सबसे ऊंचे पद प्राप्त किए। सवाई जयसिंह द्वितीय ने विश्व के सबसे सुनियोजित नगरों में से एक, जयपुर, बसाया।

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दूल्हेराय
ढूंढाड़ में संस्थापक
🤝
1562
भारमल — मुगल संबंध
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1727
जयपुर की स्थापना
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जमवाय माता
कुलदेवी
📑 विषय सूची 11 टॉपिक

उत्पत्ति व प्रारंभिक शासक

मुगल काल

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भारमल (बिहारीमल)

मुगलों की अधीनता स्वीकार करने वाले पहले राजपूत शासक

अति महत्वपूर्ण
  • जनवरी 1562 में सांगानेर में अकबर से भेंट कर अधीनता स्वीकार की।
  • पुत्री हरखाबाई का विवाह अकबर से (सांभर में) — जहांगीर की माता।
  • अकबर ने 5000 का मनसब दिया।
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राजा मानसिंह प्रथम (1589-1614)

अकबर के नवरत्नों में · 7000 का मनसबदार

अति महत्वपूर्ण
  • भगवंतदास के पुत्र; भगवंतदास की पुत्री मानबाई का विवाह शाहज़ादा सलीम (जहांगीर) से — खुसरो की माता।
  • अकबर ने 7000 का मनसब दिया — किसी हिंदू को दिया गया सर्वोच्च मनसब।
  • हल्दीघाटी (1576) में मुगल सेना के सेनापति; काबुल, बंगाल, बिहार और उड़ीसा के सूबेदार रहे।
  • बंगाल के जसोर से शिला देवी की प्रतिमा लाकर आमेर में स्थापित की; आमेर महल; बिहार में राजमहल (अकबरनगर) बसाया; वाराणसी में मान मंदिर।
  • रानी कनकावती ने पुत्र जगतसिंह की स्मृति में आमेर में जगत शिरोमणि मंदिर बनवाया।

🏹 मिर्ज़ा राजा जयसिंह (1621-67)

जहांगीर, शाहजहां व औरंगजेब — तीन बादशाहों की सेवा की; शाहजहां ने "मिर्ज़ा राजा" की उपाधि दी। पुरंदर की संधि (1665) में शिवाजी को समझौते के लिए राज़ी किया।

🛡️ रामसिंह प्रथम व बिशनसिंह

मुगल सेवा जारी रही; रामसिंह प्रथम के संरक्षण में शिवाजी आगरा से निकलने में सफल हुए — जिससे औरंगजेब नाराज़ हुआ।

सवाई जयसिंह द्वितीय

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सवाई जयसिंह द्वितीय (1700-1743)

जयपुर के संस्थापक · खगोलशास्त्री शासक

अति महत्वपूर्ण
"सवाई" उपाधिऔरंगजेब द्वारा
जयपुर की स्थापना18 नवंबर 1727
वास्तुकारविद्याधर भट्टाचार्य
जंतर-मंतर5 (जयपुर, दिल्ली, उज्जैन, मथुरा, वाराणसी)
  • जयपुर ग्रिड पद्धति पर बसाया गया; शहर नौ खंडों (चौकड़ियों) में बंटा; "भारत का पेरिस"।
  • पांच वेधशालाएं (जंतर-मंतर) बनवाईं — सबसे पहले दिल्ली (1724) में; जयपुर का जंतर-मंतर सबसे बड़ा (2010 में विश्व धरोहर)।
  • खगोलीय सारणी "ज़ीज मुहम्मदशाही" तैयार कराई; अश्वमेध और वाजपेय यज्ञ किए — अश्वमेध करने वाले अंतिम हिंदू शासक।
  • मराठों के विरुद्ध राजपूत एकता हेतु हुरड़ा सम्मेलन (1734) की पहल की।
  • जयगढ़ दुर्ग (जयबाण तोप) व नाहरगढ़ (1734); गोविंददेव जी की प्रतिमा वृंदावन से लाकर स्थापित की।
  • गंगवाना युद्ध (1741) में जोधपुर के अभयसिंह-बख्तसिंह को हराया।

उत्तरकालीन शासक

शासककालप्रमुख घटनाएं / उपलब्धियां
ईश्वरीसिंह1743-50भाई माधोसिंह से उत्तराधिकार संघर्ष; राजमहल (1747) में विजय — ईसरलाट (सरगासूली); बगरू (1748) में पराजय; मराठों के दबाव में 1750 में आत्महत्या
माधोसिंह प्रथम1750-68सवाई माधोपुर नगर बसाया (1763); चाकसू में शीतला माता मंदिर; मोती डूंगरी
सवाई प्रतापसिंह1778-1803हवा महल (1799); "ब्रजनिधि" नाम से काव्य; संगीतज्ञों की मंडली "गंधर्व बाईसी"; चित्रकला का स्वर्णकाल; तूंगा (1787) में सिंधिया पर विजय
जगतसिंह द्वितीय1803-18कृष्णा कुमारी विवाद — जोधपुर से गिंगोली युद्ध (1807); 1818 में अंग्रेज़ों से संधि
सवाई रामसिंह द्वितीय1835-801857 में अंग्रेज़ों का साथ — "सितार-ए-हिंद"; जयपुर को गुलाबी रंग (1876) में रंगवाया; अल्बर्ट हॉल, रामनिवास बाग, मेयो अस्पताल; महाराजा स्कूल (1844), "मदरसा-ए-हुनरी" (1857)
माधोसिंह द्वितीय1880-1922मुबारक महल; 1902 में इंग्लैंड यात्रा — गंगाजल हेतु चांदी के विशाल पात्र "गंगाजली"
सवाई मानसिंह द्वितीय1922-49वृहत् राजस्थान के राजप्रमुख (1949); पत्नी महारानी गायत्री देवी

अलवर का नरूका राजवंश

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अलवर (कछवाहों की नरूका शाखा)

संस्थापक प्रतापसिंह नरूका (1775)

महत्वपूर्ण
  • प्रतापसिंह नरूका ने 1775 में अलवर राज्य की स्थापना की; राजधानी पहले राजगढ़, फिर अलवर।
  • बख्तावरसिंह — 1803 में अंग्रेज़ों से संधि करने वाले राजस्थान के पहले शासकों में; उनकी स्मृति में मूसी महारानी की छतरी।
  • विनयसिंह — सिलीसेढ़ महल; अलवर चित्रकला का स्वर्णकाल।
  • जयसिंह — विजय मंदिर पैलेस (1918); अंग्रेज़ों ने 1933 में गद्दी से हटाया।

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) कछवाहा वंश के संस्थापक — दूल्हेराय (1137, दौसा)। (2) अकबर से वैवाहिक संबंध — भारमल (1562), सांभर में। (3) जयपुर की स्थापना — सवाई जयसिंह द्वितीय (1727); वास्तुकार — विद्याधर भट्टाचार्य।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. ढूंढाड़ में कछवाहा राज्य के संस्थापक — दूल्हेराय; कुलदेवी — जमवाय माता।
  2. आमेर को राजधानी बनाया — कोकिलदेव।
  3. "बारह कोटड़ी" व्यवस्था — पृथ्वीराज कछवाहा।
  4. अकबर से भेंट (1562, सांगानेर) — भारमल; पुत्री हरखाबाई।
  5. 7000 का मनसब, हल्दीघाटी के सेनापति — मानसिंह प्रथम।
  6. जगत शिरोमणि मंदिर — रानी कनकावती।
  7. पुरंदर की संधि (1665) — मिर्ज़ा राजा जयसिंह।
  8. जयपुर की स्थापना — 18 नवंबर 1727; वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य।
  9. पहला जंतर-मंतर — दिल्ली (1724); ज़ीज मुहम्मदशाही।
  10. ईसरलाट — ईश्वरीसिंह; सवाई माधोपुर — माधोसिंह प्रथम।
  11. गंधर्व बाईसी — सवाई प्रतापसिंह।
  12. अलवर राज्य की स्थापना — प्रतापसिंह नरूका (1775)।
  13. अकबर का “फर्जंद”, हल्दीघाटी में मुगल सेनापति — मानसिंह प्रथम।
  14. पुरंदर की संधि (1665, शिवाजी) — मिर्जा राजा जयसिंह।
  15. हवामहल — सवाई प्रतापसिंह (1799)।
  16. वृहत राजस्थान के राजप्रमुख — सवाई मानसिंह द्वितीय।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 ढूंढाड़ में कछवाहा राज्य की स्थापना किसने की?

2 "बारह कोटड़ी" व्यवस्था किसने आरंभ की?

3 भारमल ने अकबर से भेंट कहां की?

4 अकबर ने मानसिंह को कितने का मनसब दिया?

5 पुरंदर की संधि (1665) किसने करवाई?

6 जयपुर नगर की स्थापना कब हुई?

7 सवाई जयसिंह ने पहला जंतर-मंतर कहां बनवाया?

8 "ईसरलाट" का निर्माण किसने करवाया?

9 सवाई माधोपुर नगर किसने बसाया?

10 अलवर राज्य की स्थापना किसने की?

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