आमेर-जयपुर का कछवाहा वंश
कछवाहा राजवंश ने ढूंढाड़ क्षेत्र (आमेर-जयपुर) पर शासन किया। मुगलों से वैवाहिक व राजनीतिक संबंध बनाकर कछवाहों ने साम्राज्य में सबसे ऊंचे पद प्राप्त किए। सवाई जयसिंह द्वितीय ने विश्व के सबसे सुनियोजित नगरों में से एक, जयपुर, बसाया।
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उत्पत्ति व प्रारंभिक शासक
- कछवाहे स्वयं को श्रीराम के पुत्र कुश का वंशज मानते हैं (आमेर शिलालेख 1612 में "रघुवंश तिलक")। ये मूलतः नरवर (मध्य प्रदेश) के कछवाहों की शाखा थे।
- दूल्हेराय (लगभग 1137) ने दौसा के बड़गूजरों व मीणाओं को हराकर राज्य स्थापित किया; फिर रामगढ़ (जमवारामगढ़) जीतकर वहां कुलदेवी जमवाय माता का मंदिर बनवाया।
- कोकिलदेव ने मीणाओं से आमेर जीतकर उसे राजधानी बनाया।
- पृथ्वीराज कछवाहा — खानवा (1527) में राणा सांगा के पक्ष में लड़े; राज्य को अपने 12 पुत्रों में बांटकर "बारह कोटड़ी" व्यवस्था बनाई।
मुगल काल
भारमल (बिहारीमल)
मुगलों की अधीनता स्वीकार करने वाले पहले राजपूत शासक
- जनवरी 1562 में सांगानेर में अकबर से भेंट कर अधीनता स्वीकार की।
- पुत्री हरखाबाई का विवाह अकबर से (सांभर में) — जहांगीर की माता।
- अकबर ने 5000 का मनसब दिया।
राजा मानसिंह प्रथम (1589-1614)
अकबर के नवरत्नों में · 7000 का मनसबदार
- भगवंतदास के पुत्र; भगवंतदास की पुत्री मानबाई का विवाह शाहज़ादा सलीम (जहांगीर) से — खुसरो की माता।
- अकबर ने 7000 का मनसब दिया — किसी हिंदू को दिया गया सर्वोच्च मनसब।
- हल्दीघाटी (1576) में मुगल सेना के सेनापति; काबुल, बंगाल, बिहार और उड़ीसा के सूबेदार रहे।
- बंगाल के जसोर से शिला देवी की प्रतिमा लाकर आमेर में स्थापित की; आमेर महल; बिहार में राजमहल (अकबरनगर) बसाया; वाराणसी में मान मंदिर।
- रानी कनकावती ने पुत्र जगतसिंह की स्मृति में आमेर में जगत शिरोमणि मंदिर बनवाया।
🏹 मिर्ज़ा राजा जयसिंह (1621-67)
जहांगीर, शाहजहां व औरंगजेब — तीन बादशाहों की सेवा की; शाहजहां ने "मिर्ज़ा राजा" की उपाधि दी। पुरंदर की संधि (1665) में शिवाजी को समझौते के लिए राज़ी किया।
🛡️ रामसिंह प्रथम व बिशनसिंह
मुगल सेवा जारी रही; रामसिंह प्रथम के संरक्षण में शिवाजी आगरा से निकलने में सफल हुए — जिससे औरंगजेब नाराज़ हुआ।
सवाई जयसिंह द्वितीय
सवाई जयसिंह द्वितीय (1700-1743)
जयपुर के संस्थापक · खगोलशास्त्री शासक
- जयपुर ग्रिड पद्धति पर बसाया गया; शहर नौ खंडों (चौकड़ियों) में बंटा; "भारत का पेरिस"।
- पांच वेधशालाएं (जंतर-मंतर) बनवाईं — सबसे पहले दिल्ली (1724) में; जयपुर का जंतर-मंतर सबसे बड़ा (2010 में विश्व धरोहर)।
- खगोलीय सारणी "ज़ीज मुहम्मदशाही" तैयार कराई; अश्वमेध और वाजपेय यज्ञ किए — अश्वमेध करने वाले अंतिम हिंदू शासक।
- मराठों के विरुद्ध राजपूत एकता हेतु हुरड़ा सम्मेलन (1734) की पहल की।
- जयगढ़ दुर्ग (जयबाण तोप) व नाहरगढ़ (1734); गोविंददेव जी की प्रतिमा वृंदावन से लाकर स्थापित की।
- गंगवाना युद्ध (1741) में जोधपुर के अभयसिंह-बख्तसिंह को हराया।
उत्तरकालीन शासक
| शासक | काल | प्रमुख घटनाएं / उपलब्धियां |
|---|---|---|
| ईश्वरीसिंह | 1743-50 | भाई माधोसिंह से उत्तराधिकार संघर्ष; राजमहल (1747) में विजय — ईसरलाट (सरगासूली); बगरू (1748) में पराजय; मराठों के दबाव में 1750 में आत्महत्या |
| माधोसिंह प्रथम | 1750-68 | सवाई माधोपुर नगर बसाया (1763); चाकसू में शीतला माता मंदिर; मोती डूंगरी |
| सवाई प्रतापसिंह | 1778-1803 | हवा महल (1799); "ब्रजनिधि" नाम से काव्य; संगीतज्ञों की मंडली "गंधर्व बाईसी"; चित्रकला का स्वर्णकाल; तूंगा (1787) में सिंधिया पर विजय |
| जगतसिंह द्वितीय | 1803-18 | कृष्णा कुमारी विवाद — जोधपुर से गिंगोली युद्ध (1807); 1818 में अंग्रेज़ों से संधि |
| सवाई रामसिंह द्वितीय | 1835-80 | 1857 में अंग्रेज़ों का साथ — "सितार-ए-हिंद"; जयपुर को गुलाबी रंग (1876) में रंगवाया; अल्बर्ट हॉल, रामनिवास बाग, मेयो अस्पताल; महाराजा स्कूल (1844), "मदरसा-ए-हुनरी" (1857) |
| माधोसिंह द्वितीय | 1880-1922 | मुबारक महल; 1902 में इंग्लैंड यात्रा — गंगाजल हेतु चांदी के विशाल पात्र "गंगाजली" |
| सवाई मानसिंह द्वितीय | 1922-49 | वृहत् राजस्थान के राजप्रमुख (1949); पत्नी महारानी गायत्री देवी |
अलवर का नरूका राजवंश
अलवर (कछवाहों की नरूका शाखा)
संस्थापक प्रतापसिंह नरूका (1775)
- प्रतापसिंह नरूका ने 1775 में अलवर राज्य की स्थापना की; राजधानी पहले राजगढ़, फिर अलवर।
- बख्तावरसिंह — 1803 में अंग्रेज़ों से संधि करने वाले राजस्थान के पहले शासकों में; उनकी स्मृति में मूसी महारानी की छतरी।
- विनयसिंह — सिलीसेढ़ महल; अलवर चित्रकला का स्वर्णकाल।
- जयसिंह — विजय मंदिर पैलेस (1918); अंग्रेज़ों ने 1933 में गद्दी से हटाया।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) कछवाहा वंश के संस्थापक — दूल्हेराय (1137, दौसा)। (2) अकबर से वैवाहिक संबंध — भारमल (1562), सांभर में। (3) जयपुर की स्थापना — सवाई जयसिंह द्वितीय (1727); वास्तुकार — विद्याधर भट्टाचार्य।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- ढूंढाड़ में कछवाहा राज्य के संस्थापक — दूल्हेराय; कुलदेवी — जमवाय माता।
- आमेर को राजधानी बनाया — कोकिलदेव।
- "बारह कोटड़ी" व्यवस्था — पृथ्वीराज कछवाहा।
- अकबर से भेंट (1562, सांगानेर) — भारमल; पुत्री हरखाबाई।
- 7000 का मनसब, हल्दीघाटी के सेनापति — मानसिंह प्रथम।
- जगत शिरोमणि मंदिर — रानी कनकावती।
- पुरंदर की संधि (1665) — मिर्ज़ा राजा जयसिंह।
- जयपुर की स्थापना — 18 नवंबर 1727; वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य।
- पहला जंतर-मंतर — दिल्ली (1724); ज़ीज मुहम्मदशाही।
- ईसरलाट — ईश्वरीसिंह; सवाई माधोपुर — माधोसिंह प्रथम।
- गंधर्व बाईसी — सवाई प्रतापसिंह।
- अलवर राज्य की स्थापना — प्रतापसिंह नरूका (1775)।
- अकबर का “फर्जंद”, हल्दीघाटी में मुगल सेनापति — मानसिंह प्रथम।
- पुरंदर की संधि (1665, शिवाजी) — मिर्जा राजा जयसिंह।
- हवामहल — सवाई प्रतापसिंह (1799)।
- वृहत राजस्थान के राजप्रमुख — सवाई मानसिंह द्वितीय।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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1 ढूंढाड़ में कछवाहा राज्य की स्थापना किसने की?
2 "बारह कोटड़ी" व्यवस्था किसने आरंभ की?
3 भारमल ने अकबर से भेंट कहां की?
4 अकबर ने मानसिंह को कितने का मनसब दिया?
5 पुरंदर की संधि (1665) किसने करवाई?
6 जयपुर नगर की स्थापना कब हुई?
7 सवाई जयसिंह ने पहला जंतर-मंतर कहां बनवाया?
8 "ईसरलाट" का निर्माण किसने करवाया?
9 सवाई माधोपुर नगर किसने बसाया?
10 अलवर राज्य की स्थापना किसने की?