जैसलमेर का भाटी वंश
भाटी राजपूत स्वयं को श्रीकृष्ण के यदुवंश से जोड़ते हैं। राजस्थान की पश्चिमी सीमा पर स्थित होने के कारण इन्होंने सदियों तक बाहरी आक्रमणों का सबसे पहले सामना किया, इसलिए इन्हें "उत्तर भड़ किवाड़" (उत्तर दिशा के द्वार के रक्षक) कहा गया।
📑 विषय सूची 9 टॉपिक
📍 भाटी राज्य का क्षेत्र प्राचीन काल में "माड" या "वल्ल" प्रदेश कहलाता था। भाटियों की शाखाएं जैसलमेर के अलावा भटनेर (हनुमानगढ़), पूगल (बीकानेर) व देरावर क्षेत्र में भी रहीं।
उत्पत्ति व प्रारंभिक राजधानियां
- भाटी अपने पूर्वज राजा भाटी के नाम पर कहलाए; वे स्वयं को यदुवंशी (चंद्रवंशी) मानते हैं।
- प्रारंभिक राजधानियां — तनोट (राव तणु / तनुराव), देरावर (देवराज), फिर लोद्रवा।
- लोद्रवा — प्राचीन राजधानी; यहां का पार्श्वनाथ जैन मंदिर प्रसिद्ध है; लोककथा "मूमल-महेंद्र" लोद्रवा की राजकुमारी मूमल से जुड़ी है।
- भाटियों की कुलदेवी — स्वांगिया (आवड़) माता।
| राजधानी / केंद्र | संबंधित शासक | विशेष |
|---|---|---|
| तनोट | राव तणु (तनुराव) | तनोट माता का मंदिर — "थार की वैष्णो देवी"; 1965 व 1971 के युद्धों से जुड़ी आस्था; सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा पूजा |
| देरावर | देवराज | देरावर दुर्ग — वर्तमान में पाकिस्तान (बहावलपुर) में |
| लोद्रवा | देवराज के वंशज | परमारों से जीती गई प्राचीन राजधानी; काक नदी के किनारे; पार्श्वनाथ जैन मंदिर; मूमल की मेड़ी |
| भटनेर | भूपत भाटी | भाटियों द्वारा बसाया गया भटनेर दुर्ग (हनुमानगढ़); 1398 में तैमूर ने आक्रमण किया (दुलचंद भाटी) |
| जैसलमेर | रावल जैसल | 1155 ई. से स्थायी राजधानी |
रावल जैसल
जैसलमेर के संस्थापक · 1155 ई.
- लोद्रवा को असुरक्षित मानकर 1155 ई. में त्रिकूट पहाड़ी पर जैसलमेर नगर व सोनार किला बनवाया।
- सोनार किला पीले पत्थरों से बना है, जिसमें चूने का प्रयोग नहीं हुआ; इसमें 99 बुर्ज हैं।
जैसलमेर के ढाई साके
| साका | आक्रमणकारी | भाटी शासक | विशेष |
|---|---|---|---|
| प्रथम साका | अलाउद्दीन खिलजी | रावल मूलराज व कुंवर रतनसिंह | केसरिया व जौहर दोनों |
| द्वितीय साका | फिरोज़शाह तुगलक | रावल दूदा व तिलकसी | केसरिया व जौहर दोनों |
| अर्द्ध साका | कंधार का अमीर अली (1550) | रावल लूणकरण | केवल केसरिया; जौहर नहीं हुआ — इसलिए "आधा" साका |
मुगल काल व उसके बाद
| शासक | प्रमुख घटनाएं |
|---|---|
| रावल हरराज | नागौर दरबार (1570) में अकबर की अधीनता स्वीकार की; पुत्री नाथीबाई का विवाह अकबर से; जैसलमेर चित्रकला शैली को संरक्षण |
| भीम | मुगल सेवा में |
| महारावल अखैसिंह | 1756 में जैसलमेर में "अखैशाही" चांदी के सिक्के चलाए |
| मूलराज द्वितीय | 1818 में अंग्रेज़ों से संधि; उनके दीवान सालिमसिंह का अत्यधिक प्रभाव व अत्याचार रहा (सालिमसिंह की हवेली — "जहाज महल") |
आधुनिक काल, स्वतंत्रता आंदोलन व एकीकरण
सागरमल गोपा
जैसलमेर के स्वतंत्रता सेनानी · जेल में बलिदान (1946)
- जैसलमेर के महारावल जवाहरसिंह के निरंकुश शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई।
- पुस्तकें — "जैसलमेर का गुंडा राज" व "आज़ादी के दीवाने"।
- जेल में अमानवीय यातनाएं दी गईं; 4 अप्रैल 1946 को उन पर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया गया।
- उनकी स्मृति में इंदिरा गांधी नहर की एक शाखा का नाम "सागरमल गोपा शाखा" रखा गया।
- 1818 की संधि के बाद जैसलमेर अंग्रेज़ों का संरक्षित राज्य बना; मूलराज द्वितीय के बाद गजसिंह, रणजीतसिंह, बैरीसाल, शालिवाहन, जवाहरसिंह आदि शासक हुए।
- स्वतंत्रता के समय शासक महारावल जवाहरसिंह थे; बाद में महारावल गिरधरसिंह के समय जैसलमेर वृहत राजस्थान (30 मार्च 1949) में शामिल हुआ।
- पूगल के भाटियों से बीकानेर के राठौड़ों के वैवाहिक संबंध थे — राव बीका का विवाह पूगल के राव शेखा भाटी की पुत्री से हुआ था।
जैसलमेर का सांस्कृतिक योगदान
📜 जिनभद्र सूरि ज्ञान भंडार
सोनार किले में; ताड़पत्र पर लिखे प्राचीन जैन ग्रंथ।
🏘️ हवेलियां
पटवों की हवेली, सालिमसिंह की हवेली, नथमल की हवेली — पत्थर पर बारीक नक्काशी।
🏜️ बड़ा बाग
भाटी शासकों की कलात्मक छतरियां।
🎤 मांड गायकी
प्राचीन "माड" प्रदेश (जैसलमेर) की गायन शैली — "केसरिया बालम"।
💧 गड़सीसर तालाब
महारावल गड़सी द्वारा 14वीं सदी में निर्मित; तट पर टीलों की पोल।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) भाटियों की उपाधि — “उत्तर भड़ किवाड़”; स्वयं को यदुवंशी मानते हैं। (2) जैसलमेर में ढाई साके — तीसरा (1550) “अर्द्ध” क्योंकि उसमें जौहर नहीं हुआ। (3) अखैशाही — जैसलमेर का सिक्का; गजशाही — बीकानेर का (उलटा न करें)।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- भाटी — यदुवंशी; उपाधि — "उत्तर भड़ किवाड़"।
- प्रारंभिक राजधानियां — तनोट, देरावर, लोद्रवा।
- जैसलमेर की स्थापना — रावल जैसल, 1155, त्रिकूट पहाड़ी।
- जैसलमेर का प्रथम साका — अलाउद्दीन खिलजी, रावल मूलराज।
- अर्द्ध साका — 1550, रावल लूणकरण, अमीर अली।
- अकबर की अधीनता — रावल हरराज (1570)।
- अखैशाही सिक्के — अखैसिंह (1756)।
- अंग्रेज़ों से संधि — मूलराज द्वितीय (1818); दीवान सालिमसिंह।
- भाटियों की कुलदेवी — स्वांगिया (आवड़) माता।
- "थार की वैष्णो देवी" — तनोट माता; देरावर — अब पाकिस्तान में।
- भटनेर दुर्ग — भूपत भाटी; तैमूर का आक्रमण — 1398।
- लोद्रवा — काक नदी के किनारे; पार्श्वनाथ मंदिर।
- सागरमल गोपा का बलिदान — 4 अप्रैल 1946, जैसलमेर जेल।
- "जैसलमेर का गुंडा राज" — सागरमल गोपा।
- जैसलमेर का विलय — वृहत राजस्थान (30 मार्च 1949)।
- सोनार किले में चूने का प्रयोग — नहीं; बुर्ज — 99।
- अंग्रेज़ों से संधि — मूलराज द्वितीय (1818)।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 भाटी राजपूत स्वयं को किसका वंशज मानते हैं?
2 जैसलमेर नगर की स्थापना किसने की?
3 जैसलमेर की स्थापना किस वर्ष हुई?
4 जैसलमेर का "अर्द्ध साका" किस शासक के समय हुआ?
5 जैसलमेर के द्वितीय साके के समय आक्रमणकारी कौन था?
6 "अखैशाही" सिक्के किसने चलाए?
7 भाटियों को किस उपाधि से जाना जाता है?
8 भाटियों की कुलदेवी कौन हैं?
9 मूलराज द्वितीय के प्रभावशाली दीवान कौन थे?
10 "मूमल-महेंद्र" की लोककथा किस प्राचीन राजधानी से जुड़ी है?
11 "थार की वैष्णो देवी" किसे कहा जाता है?
12 भटनेर दुर्ग पर 1398 में किसने आक्रमण किया?
13 "जैसलमेर का गुंडा राज" पुस्तक के लेखक कौन हैं?
14 सागरमल गोपा का बलिदान कब हुआ?
15 जैसलमेर रियासत किस चरण में राजस्थान में शामिल हुई?