राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति (वन संपदा)

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राजस्थान का अधिकांश भाग शुष्क व अर्द्ध-शुष्क होने के कारण यहां वन क्षेत्र देश के औसत से बहुत कम है। वनों का वितरण वर्षा पर निर्भर है — दक्षिण व दक्षिण-पूर्व के अधिक वर्षा वाले भागों में घने पतझड़ी वन और पश्चिम के मरुस्थल में कांटेदार झाड़ियां व घासें मिलती हैं।

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~4.87%
वन आवरण (ISFR 2021)
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उदयपुर
सर्वाधिक वन क्षेत्र
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खेजड़ी
राज्य वृक्ष (1983)
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रोहिड़ा
राज्य पुष्प (1983)
📑 विषय सूची 12 टॉपिक

राजस्थान में वनों की स्थिति

वन आवरण (ISFR 2021)लगभग 16,655 वर्ग किमी (राज्य क्षेत्रफल का ~4.87%)
अभिलिखित वन क्षेत्रराज्य क्षेत्रफल का लगभग 9.6%
सर्वाधिक वन क्षेत्रउदयपुर जिला
न्यूनतम वन क्षेत्रचूरू जिला

📝 ध्यान दें: ISFR के जिलेवार आंकड़े पुराने 33 जिलों के आधार पर हैं। परीक्षा में प्रायः उदयपुर (सर्वाधिक) व चूरू (न्यूनतम) पूछा जाता है। नवीनतम रिपोर्ट के सटीक आंकड़े परीक्षा से पहले अवश्य देख लें।

वनों के प्रकार

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उष्ण कटिबंधीय कांटेदार वन

मरुस्थलीय वन · 50 सेमी से कम वर्षा वाले क्षेत्र

महत्वपूर्ण
  • क्षेत्र — जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़।
  • प्रमुख वृक्ष-झाड़ियां — खेजड़ी, रोहिड़ा, बेर, कैर, बबूल, फोग, आक, थोर, कुमट।
  • पत्तियां छोटी व कांटेदार, जड़ें गहरी — जल की कमी के अनुकूल।
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उष्ण कटिबंधीय शुष्क पतझड़ वन

राज्य में सर्वाधिक विस्तार वाले वन · 50-100 सेमी वर्षा

अति महत्वपूर्ण

गर्मियों में पत्तियां गिरा देने वाले ये वन अरावली व हाड़ौती क्षेत्र में फैले हैं। इनके कई उप-प्रकार हैं —

उप-प्रकारक्षेत्रविशेषता
शुष्क सागवान वनबांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, दक्षिणी उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बारांसागवान (टीक) — इमारती लकड़ी; सर्वाधिक बांसवाड़ा में
सालर वनउदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, सिरोही, अजमेरसालर की लकड़ी — पैकिंग के डिब्बे व प्लाईवुड
धोकड़ा वनअरावली — अजमेर, अलवर, जयपुर, सवाई माधोपुर, कोटा, उदयपुरशुष्क पतझड़ वनों में सर्वाधिक विस्तार; धोकड़ा — कोयला बनाने में उपयोगी
बांस वनबांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बारां, कोटा, सिरोहीबांस को "आदिवासियों का हरा सोना" कहते हैं
पलाश (ढाक) वनअलवर, अजमेर, उदयपुर, राजसमंद, सिरोहीपलाश को "जंगल की आग" कहते हैं; पत्तियों से पत्तल-दोने
मिश्रित पतझड़ वनउदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, सिरोहीआम, खैर, तेंदू, गूलर, बहेड़ा, महुआ
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उपोष्ण कटिबंधीय पर्वतीय वन

केवल माउंट आबू (सिरोही) क्षेत्र

महत्वपूर्ण
  • राज्य के सबसे सघन व सदाबहार प्रकृति के वन; 150 सेमी के लगभग वर्षा व अधिक ऊंचाई के कारण।
  • प्रमुख वृक्ष — आम, बांस, नीम, सागवान, जामुन, बेल व अनेक औषधीय पौधे।
  • माउंट आबू में डिकलिप्टेरा आबूएंसिस नामक दुर्लभ पौधा केवल यहीं पाया जाता है।

राज्य वृक्ष व राज्य पुष्प

🌿 खेजड़ी — राज्य वृक्ष (1983)

वैज्ञानिक नाम Prosopis cineraria; "थार का कल्पवृक्ष", "राजस्थान का गौरव"। फलियां — सांगरी; पत्तियां — लूंग (पशु चारा)। सर्वाधिक — शेखावाटी क्षेत्र।

🌸 रोहिड़ा — राज्य पुष्प (1983)

वैज्ञानिक नाम Tecomella undulata; "मरुस्थल का सागवान", "मारवाड़ टीक"। केसरिया-पीले फूल; पश्चिमी राजस्थान में।

🙏

खेजड़ली बलिदान (1730 ई.)

विश्व का अनूठा वृक्ष संरक्षण आंदोलन · खेजड़ली (जोधपुर)

अति महत्वपूर्ण
  • जोधपुर के महाराजा अभयसिंह के समय महल निर्माण हेतु खेजड़ी वृक्ष काटने के आदेश का विरोध।
  • अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने वृक्षों से लिपटकर बलिदान दिया।
  • तिथि — भाद्रपद शुक्ल दशमी; प्रतिवर्ष यहां वृक्ष मेला लगता है।
  • राज्य सरकार वन व वन्यजीव संरक्षण हेतु अमृता देवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार देती है।
  • बिश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक जांभोजी ने 29 नियमों में वृक्ष व जीव रक्षा पर बल दिया।

मरुस्थल की प्रमुख घासें

घासविशेषता
सेवण (लीलोण)सर्वाधिक पौष्टिक घास; जैसलमेर की लाठी सीरीज़ क्षेत्र में; गोडावण का आवास
धामणदुधारू पशुओं के लिए उपयोगी
करड़, बुर, मुरट, मोडा धामणमरुस्थलीय चारागाहों की घासें
खससुगंधित घास — इत्र व शरबत; भरतपुर, सवाई माधोपुर, टोंक

वनों से प्राप्त उपज

🍃 तेंदू पत्ता

बीड़ी बनाने में; "टिमरू" भी कहते हैं — उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बारां, झालावाड़।

🌼 महुआ

आदिवासियों का कल्पवृक्ष; फूलों से शराब व फलों से तेल — डूंगरपुर, बांसवाड़ा।

🪵 खैर

कत्था बनाने में; कत्था बनाने वाली जाति — "कथौड़ी"।

🍯 गोंद

खेजड़ी, बबूल, कुमट, धोकड़ा से; सर्वाधिक कुमट से।

🌿 आंवल (आवरा)

छाल से चमड़ा रंगने (टैनिंग) में।

🍂 बांस

टोकरियां, फर्नीचर, घर निर्माण — "आदिवासियों का हरा सोना"।

वन नीति व संस्थान

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) राज्य वृक्ष खेजड़ी व राज्य पुष्प रोहिड़ा — दोनों 1983। (2) सर्वाधिक वन — उदयपुर; न्यूनतम — चूरू। (3) खेजड़ली बलिदान — 1730, अमृता देवी, 363 लोग।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. वन आवरण — लगभग 4.87% (ISFR 2021); अभिलिखित वन — ~9.6%।
  2. सर्वाधिक वन — उदयपुर; न्यूनतम — चूरू।
  3. सर्वाधिक विस्तार वाले वन — उष्ण कटिबंधीय शुष्क पतझड़ वन।
  4. शुष्क पतझड़ वनों में सर्वाधिक — धोकड़ा।
  5. सागवान वन सर्वाधिक — बांसवाड़ा।
  6. पर्वतीय (उपोष्ण) वन — केवल माउंट आबू।
  7. राज्य वृक्ष — खेजड़ी (1983); राज्य पुष्प — रोहिड़ा (1983)।
  8. खेजड़ली बलिदान — 1730, अमृता देवी, 363 लोग।
  9. सर्वाधिक पौष्टिक घास — सेवण।
  10. राज्य की प्रथम वन नीति — 2010।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 राजस्थान का राज्य वृक्ष कौन-सा है?

2 "मरुस्थल का सागवान" किसे कहा जाता है?

3 राजस्थान में सर्वाधिक वन क्षेत्र वाला जिला कौन-सा है?

4 राजस्थान में सर्वाधिक विस्तार वाले वन कौन-से हैं?

5 उपोष्ण कटिबंधीय पर्वतीय वन राजस्थान में कहां पाए जाते हैं?

6 खेजड़ली बलिदान का नेतृत्व किसने किया?

7 खेजड़ली बलिदान में कितने लोगों ने बलिदान दिया?

8 सर्वाधिक पौष्टिक मरुस्थलीय घास कौन-सी है?

9 "आदिवासियों का हरा सोना" किसे कहा जाता है?

10 खेजड़ी की फलियों को क्या कहते हैं?

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