राजस्थान के प्रमुख दुर्ग
राजस्थान को "दुर्गों की भूमि" कहा जाता है। मरुस्थल, अरावली की पहाड़ियों और नदियों के बीच बसे यहां के किले केवल सैन्य ठिकाने नहीं, बल्कि शौर्य, साकों, जौहर और स्थापत्य कला के जीवंत प्रमाण हैं। राज्य के लगभग हर जिले में कोई न कोई ऐतिहासिक दुर्ग मौजूद है।
📑 विषय सूची 15 टॉपिक
- दुर्गों के प्रकार
- यूनेस्को विश्व धरोहर: राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग
- कुंभलगढ़ दुर्ग
- रणथंभौर दुर्ग
- गागरोन दुर्ग
- सोनार किला (जैसलमेर)
- आमेर, जयगढ़ व नाहरगढ़
- मारवाड़ व मरुस्थल के प्रमुख दुर्ग
- मेहरानगढ़ दुर्ग (जोधपुर)
- जूनागढ़ दुर्ग (बीकानेर)
- पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के दुर्ग
- तुलनात्मक तालिका
- वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- अभ्यास प्रश्न (MCQ)
दुर्गों के प्रकार
प्राचीन ग्रंथ शुक्रनीति में दुर्गों के 9 प्रकार बताए गए हैं। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी दुर्गों का वर्गीकरण मिलता है। राजस्थान में लगभग सभी प्रकार के दुर्ग पाए जाते हैं।
| प्रकार | विशेषता | राजस्थान में उदाहरण |
|---|---|---|
| जल दुर्ग (औदक) | चारों ओर से पानी से घिरा | गागरोन (झालावाड़), भैंसरोडगढ़ (चित्तौड़गढ़), शेरगढ़ (बारां) |
| गिरि दुर्ग (पर्वत) | ऊंची पहाड़ी पर बना | चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, तारागढ़, जालोर, मेहरानगढ़ |
| धान्वन दुर्ग (मरु) | मरुस्थल से घिरा | सोनार किला (जैसलमेर), भटनेर (हनुमानगढ़), जूनागढ़ (बीकानेर) |
| वन दुर्ग | घने जंगल से घिरा | सिवाणा (बालोतरा), रणथंभौर |
| एरण दुर्ग | खाई, कांटों और कठोर पत्थरों के कारण दुर्गम | चित्तौड़गढ़, जालोर |
| पारिख दुर्ग | चारों ओर गहरी खाई | लोहागढ़ (भरतपुर) |
| पारिध दुर्ग | ईंट, पत्थर व मिट्टी के मज़बूत परकोटे से घिरा | चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़ |
| सैन्य दुर्ग | व्यूह रचना में दक्ष सैनिकों से रक्षित — सबसे श्रेष्ठ | — |
| सहाय दुर्ग | शूरवीर व अनुकूल बंधु-बांधवों से युक्त | — |
यूनेस्को विश्व धरोहर: राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग
21 जून 2013 को कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 37वें सत्र में राजस्थान के 6 पहाड़ी दुर्गों को एक समूह के रूप में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग
राजस्थान का गौरव · दुर्गों का सिरमौर · चित्रकूट
- कहावत — "गढ़ तो चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़ैया"। यह राजस्थान का सबसे बड़ा आवासीय (लिविंग) दुर्ग है।
- इसका प्राचीन नाम चित्रकूट था। 734 ई. में बप्पा रावल ने मौर्य शासक मान मोरी से इसे जीतकर मेवाड़ में मिलाया।
- प्रथम साका (1303): अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण; रावल रतनसिंह ने केसरिया किया और रानी पद्मिनी ने जौहर। गोरा-बादल ने वीरता दिखाई। खिलजी ने दुर्ग का नाम खिज्राबाद रखा।
- द्वितीय साका (1534-35): गुजरात के बहादुर शाह का आक्रमण; रानी कर्णावती ने जौहर किया और बाघसिंह ने केसरिया।
- तृतीय साका (1567-68): अकबर का आक्रमण; जयमल राठौड़ व पत्ता सिसोदिया ने केसरिया किया, फूलकंवर ने जौहर।
- विजय स्तंभ: महाराणा कुंभा ने मालवा के महमूद खिलजी पर सारंगपुर विजय (1437) की याद में 1440-48 ई. में बनवाया। 9 मंजिला, लगभग 122 फीट ऊंचा। शिल्पी — जैता व उसके पुत्र। इसे "भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोश" कहा जाता है।
- कीर्ति स्तंभ: 7 मंजिला जैन स्तंभ, प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ को समर्पित; 12वीं सदी में बघेरवाल जैन व्यापारी जीजा ने बनवाया।
- अन्य स्मारक: पद्मिनी महल, कुंभा महल, मीरा मंदिर, कुंभश्याम मंदिर, समिद्धेश्वर मंदिर, गोमुख कुंड, फतह प्रकाश महल, जयमल-पत्ता के महल।
कुंभलगढ़ दुर्ग
मेवाड़ की आंख · भारत की महान दीवार · कुंभलमेर
- दुर्ग की प्राचीर लगभग 36 किमी लंबी है, जिस पर कई घुड़सवार एक साथ चल सकते हैं — इसलिए इसे "भारत की महान दीवार" कहते हैं।
- दुर्ग के भीतर सबसे ऊंचे भाग पर स्थित लघु दुर्ग "कटारगढ़" कहलाता है — यह कुंभा का निवास था।
- अबुल फजल ने लिखा — यह इतनी ऊंचाई पर बना है कि नीचे से ऊपर देखने पर सिर की पगड़ी गिर जाती है।
- यहीं महाराणा प्रताप का जन्म (9 मई 1540) और उदयसिंह का राज्याभिषेक हुआ। पन्नाधाय ने बालक उदयसिंह को यहीं सुरक्षित पहुंचाया था।
- 1468 ई. में महाराणा कुंभा की हत्या उनके पुत्र ऊदा ने यहीं (मामादेव कुंड पर) की।
- दुर्ग के आसपास का क्षेत्र कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य है।
रणथंभौर दुर्ग
अन्य दुर्ग नंगे हैं, यह बख्तरबंद है · हम्मीर का हठ
- यह दुर्ग पहाड़ियों और घने जंगल के बीच इस प्रकार छिपा है कि दूर से दिखाई नहीं देता। अबुल फजल ने कहा — "अन्य सभी दुर्ग नंगे हैं, जबकि यह दुर्ग बख्तरबंद है।"
- 1301 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हम्मीर देव चौहान ने केसरिया किया और रानी रंगदेवी ने जौहर — इसे राजस्थान का प्रथम साका माना जाता है।
- हम्मीर ने खिलजी के विद्रोही सेनापति मुहम्मद शाह को शरण दी थी, जो युद्ध का कारण बना ("हम्मीर हठ")। अमीर खुसरो इस अभियान में खिलजी के साथ था।
- दुर्ग में त्रिनेत्र गणेश मंदिर है, जहां देशभर से विवाह के निमंत्रण पत्र भेजे जाते हैं। अन्य — हम्मीर महल, जोगी महल, 32 खंभों की छतरी, पद्मला तालाब।
- चारों ओर रणथंभौर टाइगर रिज़र्व (राष्ट्रीय उद्यान) फैला है।
गागरोन दुर्ग
बिना नींव का जल दुर्ग · डोडगढ़ · धूलरगढ़
- यह दुर्ग बिना नींव के सीधे चट्टान पर बना है और तीन ओर से नदियों से घिरा है।
- प्रथम साका (1423): मालवा के होशंगशाह के आक्रमण के समय अचलदास खींची ने केसरिया किया। इसका वर्णन शिवदास गाडण की "अचलदास खींची री वचनिका" में है।
- द्वितीय साका (1444): मालवा के महमूद खिलजी का आक्रमण; पाल्हणसी खींची पराजित हुए। खिलजी ने दुर्ग का नाम "मुस्तफाबाद" रखा।
- संत पीपा (गागरोन के शासक प्रतापराव खींची) की छतरी और सूफी संत मिट्ठे शाह की दरगाह यहीं है।
सोनार किला (जैसलमेर)
सोनगढ़ · त्रिकूटगढ़ · ढाई साकों वाला दुर्ग
- पीले पत्थरों से बना यह दुर्ग सूर्य की रोशनी में सोने जैसा चमकता है। इसके निर्माण में चूने का प्रयोग नहीं हुआ — पत्थरों को आपस में फंसाकर बनाया गया।
- यह लिविंग फोर्ट है — आज भी दुर्ग के भीतर बड़ी आबादी रहती है।
- इसे "ढाई साकों" वाला दुर्ग कहते हैं — दो पूर्ण साके (अलाउद्दीन खिलजी व फिरोज तुगलक के समय) और एक "अर्द्ध साका" (1550 ई., रावल लूणकरण — केसरिया हुआ पर जौहर नहीं)।
- सत्यजीत रे की फिल्म "सोनार केल्ला" इसी पर आधारित है।
- दुर्ग में जैन मंदिर (पार्श्वनाथ आदि) और जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार (प्राचीन ताड़पत्र ग्रंथ) प्रसिद्ध हैं।
आमेर, जयगढ़ व नाहरगढ़
कछवाहा राजवंश के दुर्ग (जयपुर)
- आमेर दुर्ग: कछवाहों की प्राचीन राजधानी; वर्तमान महल का निर्माण राजा मानसिंह प्रथम ने आरंभ किया। यहां शिला देवी मंदिर, शीश महल, दीवान-ए-आम, सुहाग मंदिर व गणेश पोल प्रसिद्ध हैं। मावठा झील इसके नीचे स्थित है।
- जयगढ़ दुर्ग: "चील का टीला" पहाड़ी पर; सवाई जयसिंह द्वितीय ने वर्तमान स्वरूप दिया। यहां की जयबाण तोप पहियों पर रखी एशिया की सबसे बड़ी तोप मानी जाती है। कछवाहों का खजाना यहां रखे जाने की मान्यता के कारण इसे "रहस्यमयी दुर्ग" भी कहते हैं।
- नाहरगढ़ (सुदर्शनगढ़): 1734 ई. में सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर की सुरक्षा हेतु बनवाया। सवाई माधोसिंह द्वितीय ने यहां अपनी रानियों के लिए 9 एक-जैसे महल बनवाए।
मारवाड़ व मरुस्थल के प्रमुख दुर्ग
मेहरानगढ़ दुर्ग (जोधपुर)
मयूरध्वज गढ़ · गढ़ चिंतामणि
- मोर की आकृति वाली पहाड़ी पर बने होने से इसे "मयूरध्वज गढ़" कहते हैं।
- प्रसिद्ध तोपें — किलकिला, शंभूबाण, गजनी खां, जमजमा।
- महल — मोती महल, फूल महल, शीश महल, तख्त विलास। दुर्ग में चामुंडा माता मंदिर (राव जोधा द्वारा) है।
- नींव में राजिया भांबी को जीवित चुनवाने की लोककथा प्रसिद्ध है।
- रुडयार्ड किपलिंग ने इसे देखकर कहा कि यह मानवों द्वारा नहीं, बल्कि देवताओं/परियों द्वारा बनाया गया लगता है।
जूनागढ़ दुर्ग (बीकानेर)
जमीन का जेवर · राती घाटी का किला
- समतल भूमि पर बना यह दुर्ग अपनी भव्यता के कारण "जमीन का जेवर" कहलाता है।
- मुख्य द्वार सूरजपोल पर जयमल व पत्ता की हाथी पर सवार मूर्तियां हैं।
- महल — अनूप महल (राज्याभिषेक स्थल), करण महल, फूल महल, चंद्र महल, गज मंदिर, बादल महल।
- इससे पहले राव बीका ने 1488 ई. में बीकानेर बसाकर एक छोटा किला (बीकाजी की टेकरी) बनवाया था।
🏜️ भटनेर (हनुमानगढ़)
घग्घर नदी के किनारे; भाटी शासक भूपत द्वारा निर्मित। उत्तरी सीमा का प्रहरी। 1398 ई. में तैमूर ने आक्रमण किया और "तुजुक-ए-तैमूरी" में इसे भारत का सबसे मज़बूत दुर्ग बताया। 1805 में बीकानेर के सूरतसिंह ने मंगलवार को जीतकर नाम हनुमानगढ़ रखा।
⛰️ जालोर दुर्ग
सूकड़ी नदी के पास सोनगिरि (स्वर्णगिरि) पहाड़ी पर; परमारों द्वारा निर्मित। 1311-12 ई. में कान्हड़देव सोनगरा व अलाउद्दीन खिलजी के युद्ध में साका; खिलजी ने नाम जलालाबाद रखा। पद्मनाभ कृत "कान्हड़दे प्रबंध" में वर्णन। दुर्ग में तोपखाना मस्जिद व संत मलिक शाह की दरगाह।
🌲 सिवाणा दुर्ग (बालोतरा)
छप्पन की पहाड़ियों में वीर नारायण पंवार द्वारा निर्मित। मारवाड़ के शासकों का संकटकालीन आश्रय स्थल। 1308 ई. में सातलदेव (शीतलदेव) ने अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध में साका किया; खिलजी ने नाम खैराबाद रखा।
🏯 नागौर दुर्ग
प्राचीन नाम अहिच्छत्रपुर; धूलकोट। समतल भूमि पर बना होने के बावजूद बाहर से तोप का गोला महल तक नहीं पहुंच पाता था। अमरसिंह राठौड़ की वीरता से जुड़ा; दुर्ग में बादल महल व शीश महल प्रसिद्ध।
🏰 कुचामन दुर्ग
डीडवाना-कुचामन जिले में; "जागीरी किलों का सिरमौर"। यहां की टकसाल में चांदी के सिक्के ढाले जाते थे। सुनहरी बुर्ज व शीश महल प्रसिद्ध।
🗻 अचलगढ़ (सिरोही)
माउंट आबू के पास; मूल रूप से परमारों द्वारा निर्मित, 1452 ई. में महाराणा कुंभा ने पुनर्निर्माण कराया। पास में अचलेश्वर महादेव मंदिर, जहां शिव के पैर के अंगूठे की पूजा होती है।
पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के दुर्ग
🛡️ लोहागढ़ (भरतपुर)
1733 ई. में जाट राजा सूरजमल ने मिट्टी की दोहरी दीवारों से बनवाया। अजेय दुर्ग — 1805 में लॉर्ड लेक की सेना कई बार घेरा डालकर भी नहीं जीत सकी। चारों ओर सुजान गंगा नहर (खाई)। जवाहर बुर्ज व फतेह बुर्ज; अष्टधातु का दरवाज़ा महाराजा जवाहरसिंह दिल्ली से लाए।
⭐ तारागढ़ (अजमेर)
प्राचीन नाम अजयमेरु दुर्ग; चौहान शासक अजयपाल ने बनवाया। बिशप हैबर ने इसे "पूर्व का जिब्राल्टर" कहा। दुर्ग में मीरान साहब की दरगाह है।
✨ तारागढ़ (बूंदी)
1354 ई. में राव बरसिंह हाड़ा ने बनवाया; तारे जैसी आकृति के कारण "स्टार फोर्ट"। यहां की भीम बुर्ज पर रखी गर्भ गुंजन तोप प्रसिद्ध। बूंदी महल की चित्रशाला बूंदी शैली की चित्रकला के लिए विख्यात।
🌊 भैंसरोडगढ़ (चित्तौड़गढ़)
चंबल व बामणी नदियों के संगम पर स्थित जल दुर्ग। कर्नल जेम्स टॉड ने इसे "राजस्थान का वेल्लोर" कहा।
🏞️ शेरगढ़ (बारां)
परवन नदी के किनारे जल दुर्ग; प्राचीन नाम कोशवर्धन। शेरशाह सूरी ने इसका नाम शेरगढ़ रखा।
🏔️ बाला किला (अलवर)
हसन खां मेवाती ने बनवाया। इसमें कभी कोई बड़ा युद्ध नहीं हुआ, इसलिए इसे "कुंवारा किला" कहते हैं।
🌳 कांकवाड़ी (अलवर)
सरिस्का अभयारण्य के भीतर। यहां औरंगजेब ने अपने भाई दारा शिकोह को बंदी बनाकर रखा था।
🏛️ मांडलगढ़ (भीलवाड़ा)
बनास, बेड़च व मेनाली नदियों के पास; मेवाड़ की सुरक्षा पंक्ति का प्रमुख दुर्ग। आकृति कटोरे जैसी (मंडलाकार)।
🏰 नीमराणा (कोटपूतली-बहरोड़)
चौहान शासकों का पंचमहल दुर्ग; वर्तमान में हेरिटेज होटल के रूप में प्रसिद्ध।
तुलनात्मक तालिका
| दुर्ग | जिला | निर्माता | उपनाम / विशेषता |
|---|---|---|---|
| चित्तौड़गढ़ | चित्तौड़गढ़ | चित्रांगद मौर्य | राजस्थान का गौरव, 3 साके |
| कुंभलगढ़ | राजसमंद | महाराणा कुंभा | मेवाड़ की आंख, 36 किमी दीवार |
| रणथंभौर | सवाई माधोपुर | चौहान | बख्तरबंद दुर्ग, प्रथम साका |
| गागरोन | झालावाड़ | खींची चौहान | बिना नींव का जल दुर्ग |
| सोनार किला | जैसलमेर | रावल जैसल | ढाई साके, लिविंग फोर्ट |
| मेहरानगढ़ | जोधपुर | राव जोधा | मयूरध्वज गढ़ |
| जूनागढ़ | बीकानेर | रायसिंह | जमीन का जेवर |
| लोहागढ़ | भरतपुर | सूरजमल | अजेय, मिट्टी का दुर्ग |
| तारागढ़ | अजमेर | अजयपाल | पूर्व का जिब्राल्टर |
| भटनेर | हनुमानगढ़ | भूपत भाटी | उत्तरी सीमा का प्रहरी |
| सिवाणा | बालोतरा | वीर नारायण पंवार | मारवाड़ का संकटकालीन आश्रय |
| कुचामन | डीडवाना-कुचामन | — | जागीरी किलों का सिरमौर |
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) सबसे लंबी दीवार (लगभग 36 किमी) — कुंभलगढ़। (2) जल दुर्ग — गागरोन (आहू-कालीसिंध संगम); सोनार किला — बिना चूने के। (3) UNESCO के 6 पहाड़ी दुर्ग — चित्तौड़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, गागरोन, आमेर, जैसलमेर।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- राजस्थान का प्रथम साका — रणथंभौर (1301 ई.)।
- "भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोश" — विजय स्तंभ (चित्तौड़गढ़)।
- कुंभलगढ़ के शिल्पी — मंडन; दुर्ग के भीतर का लघु दुर्ग — कटारगढ़।
- "अन्य दुर्ग नंगे हैं, यह बख्तरबंद है" — अबुल फजल ने रणथंभौर के बारे में कहा।
- बिना नींव का दुर्ग — गागरोन; "अचलदास खींची री वचनिका" — शिवदास गाडण।
- "पूर्व का जिब्राल्टर" — तारागढ़ (अजमेर); "राजस्थान का वेल्लोर" — भैंसरोडगढ़।
- एशिया की पहियों पर रखी सबसे बड़ी तोप — जयबाण (जयगढ़)।
- "जमीन का जेवर" — जूनागढ़ (बीकानेर); "मयूरध्वज गढ़" — मेहरानगढ़।
- "कुंवारा किला" — बाला किला (अलवर)।
- ढाई साकों वाला दुर्ग — सोनार किला (जैसलमेर)।
- राजस्थान के 6 पहाड़ी दुर्ग विश्व धरोहर बने — 2013 (नोम पेन्ह)।
- जागीरी किलों का सिरमौर — कुचामन।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग किस वर्ष शामिल हुए?
2 "भारत की महान दीवार" किस दुर्ग की प्राचीर को कहा जाता है?
3 राजस्थान का प्रथम साका किस दुर्ग में हुआ?
4 बिना नींव के बना जल दुर्ग कौनसा है?
5 "पूर्व का जिब्राल्टर" किस दुर्ग को कहा जाता है?
6 जयबाण तोप किस दुर्ग में स्थित है?
7 सिवाणा दुर्ग वर्तमान में किस जिले में स्थित है?
8 मिट्टी की दीवारों से बना अजेय दुर्ग कौनसा है?
9 विजय स्तंभ का निर्माण किसने करवाया?
10 "ढाई साकों" वाला दुर्ग कौनसा है?