मारवाड़ (जोधपुर) का राठौड़ वंश
मारवाड़ के राठौड़ 13वीं सदी में पाली क्षेत्र में स्थापित हुए और धीरे-धीरे पश्चिमी राजस्थान की सबसे बड़ी रियासत के स्वामी बने। राव जोधा ने जोधपुर बसाया, मालदेव ने राज्य को चरम विस्तार दिया और दुर्गादास जैसे वीरों ने मुगल सत्ता से लंबा संघर्ष किया। राठौड़ों की कुलदेवी नागणेची हैं।
📑 विषय सूची 11 टॉपिक
उत्पत्ति
- राठौड़ स्वयं को कन्नौज के गहड़वाल शासक जयचंद का वंशज मानते हैं। कुछ इतिहासकार इन्हें राष्ट्रकूटों से जोड़ते हैं, जबकि गौरीशंकर ओझा इन्हें बदायूं के राठौड़ों की शाखा मानते हैं।
- मारवाड़ (मरुवार / मरुस्थल) का प्राचीन नाम "मरु प्रदेश" था; राजधानियां — खेड़ → मंडोर → जोधपुर।
- राठौड़ों का कुलदेवता शिव व कुलदेवी नागणेची; राव धूहड़ कर्नाटक से नागणेची की मूर्ति लाकर नागाणा में स्थापित की।
प्रारंभिक शासक
| शासक | प्रमुख घटनाएं |
|---|---|
| राव सीहा | मारवाड़ में राठौड़ वंश के संस्थापक; पाली के ब्राह्मणों की रक्षा हेतु आए; 1273 में मृत्यु — बिठू (पाली) शिलालेख |
| आस्थान | खेड़ क्षेत्र पर अधिकार |
| धूहड़ | नागणेची माता की प्रतिमा कर्नाटक से लाए |
| राव मल्लीनाथ | लोक देवता; मालाणी क्षेत्र |
| राव चूंडा | इंदा प्रतिहारों से दहेज में मंडोर (1395) मिला — मंडोर को राजधानी बनाया; 1423 में नागौर में भाटियों व मुस्लिमों से युद्ध में मृत्यु |
| रणमल | बहन हंसाबाई का विवाह मेवाड़ के लाखा से; मेवाड़ में बालक कुंभा का संरक्षक; 1438 में चित्तौड़ में हत्या |
राव जोधा (1438-1489)
जोधपुर के संस्थापक
- पिता रणमल की हत्या के बाद 15 वर्ष संघर्ष कर 1453 में मंडोर पुनः प्राप्त किया।
- मेवाड़ के कुंभा से "आवल-बावल की संधि" — दोनों राज्यों की सीमा निर्धारण।
- 12 मई 1459 को जोधपुर नगर बसाया; चिड़ियाटूंक पहाड़ी पर मेहरानगढ़ दुर्ग, नींव करणी माता ने रखी।
- पुत्र बीका ने बीकानेर (1488) और वरसिंह व दूदा ने मेड़ता बसाया।
⚔️ राव सातल व राव सूजा
सातल — मुस्लिम सेना से तीजणियों (कन्याओं) को छुड़ाते हुए शहीद; इसी स्मृति में "घुड़ला पर्व"। सूजा (1492-1515) ने राज्य संभाला।
🛡️ राव गांगा (1515-32)
खानवा (1527) में राणा सांगा की सहायता हेतु सेना भेजी (पुत्र मालदेव के नेतृत्व में); मालदेव पर पिता की हत्या का आरोप लगता है।
राव मालदेव
राव मालदेव (1532-1562)
हशमत वाला राजा · 52 युद्धों का विजेता
- मारवाड़ का सबसे शक्तिशाली शासक; उसके राज्य में 58 परगने थे और नागौर, अजमेर, बीकानेर, मेड़ता आदि उसके अधीन रहे।
- पाहेबा (साहेबा) युद्ध (1541) — बीकानेर के राव जैतसी को हराया, जैतसी मारे गए।
- 1542 में मुगल शासक हुमायूं शेरशाह से पराजित होकर सहायता मांगने मारवाड़ आया, पर मालदेव ने सहायता नहीं की।
- गिरि-सुमेल (जनवरी 1544) — शेरशाह सूरी से युद्ध; जाली पत्रों के कारण मालदेव पीछे हटे; सेनापति जैता व कूंपा का बलिदान; शेरशाह — "मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की बादशाहत खो देता।"
- जैसलमेर की रानी उमादे ("रूठी रानी") से विवाह; उमादे ने अजमेर के तारागढ़ में निवास किया।
- कई दुर्गों का निर्माण/पुनर्निर्माण — पोकरण, सोजत, मालकोट (मेड़ता), रायपुर आदि।
मुगल काल
राव चंद्रसेन (1562-1581)
मारवाड़ का प्रताप · भूला-बिसरा राजा
- मालदेव के छोटे पुत्र; भाइयों राम व उदयसिंह से संघर्ष।
- नागौर दरबार (1570) में अकबर से मिले, पर अधीनता स्वीकार किए बिना लौट आए।
- सिवाणा, भाद्राजूण आदि से जीवनभर मुगलों से संघर्ष किया; महाराणा प्रताप से पहले मुगलों से टक्कर लेने वाले शासक — "प्रताप का अग्रगामी"।
| शासक | काल | प्रमुख घटनाएं |
|---|---|---|
| मोटा राजा उदयसिंह | 1583-95 | मारवाड़ का प्रथम शासक जिसने मुगल अधीनता पूर्णतः स्वीकार की; पुत्री मानीबाई (जगत गुसाईं / जोधाबाई) का विवाह जहांगीर से — शाहजहां की माता |
| सूरसिंह | 1595-1619 | मुगल सेवा में दक्षिण अभियान |
| गजसिंह | 1619-38 | जहांगीर ने "दलथंभन" की उपाधि दी; पुत्र अमरसिंह राठौड़ (नागौर) |
| जसवंतसिंह प्रथम | 1638-78 | धरमत युद्ध (1658) में औरंगजेब से पराजय; खजुवा युद्ध (1659); दीवान मुहणोत नैणसी; ग्रंथ "भाषा भूषण"; जमरूद (अफगानिस्तान) में 1678 में मृत्यु |
अजीतसिंह व वीर दुर्गादास राठौड़
30 वर्ष का मुगल-राठौड़ संघर्ष
- जसवंतसिंह की मृत्यु के बाद 1679 में लाहौर में उनके मरणोपरांत पुत्र अजीतसिंह का जन्म हुआ; औरंगजेब ने मारवाड़ को खालसा कर लिया।
- दुर्गादास राठौड़ ने बालक अजीतसिंह को दिल्ली से सुरक्षित निकाला और सिरोही के कालिंद्री गांव में छिपाकर पाला।
- दुर्गादास ने मेवाड़ (राजसिंह) से मिलकर संघर्ष किया और औरंगजेब के विद्रोही पुत्र अकबर द्वितीय को भी शरण दी।
- 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद अजीतसिंह ने जोधपुर पर अधिकार किया। बाद में अजीतसिंह से मतभेद होने पर दुर्गादास उदयपुर चले गए; उज्जैन में क्षिप्रा तट पर उनकी छतरी है।
- कर्नल टॉड ने दुर्गादास को "राठौड़ों का यूलीसेस" कहा; लोक में "मारवाड़ का अणबिंधिया मोती"।
- 1724 में अजीतसिंह की हत्या उनके पुत्र बख्तसिंह ने की।
उत्तरकालीन शासक
| शासक | काल | प्रमुख घटनाएं / उपलब्धियां |
|---|---|---|
| अभयसिंह | 1724-49 | गुजरात के सूबेदार सरबुलंद खां को हराया (राजरूपक, सूरज प्रकास); खेजड़ली बलिदान (1730) इनके समय |
| विजयसिंह | 1752-93 | पासवान गुलाबराय का प्रभाव (गुलाब सागर); विजयशाही सिक्के; तूंगा (1787) में मराठों पर विजय |
| मानसिंह | 1803-43 | नाथ संप्रदाय के अनुयायी, गुरु आयस देवनाथ; महामंदिर; कृष्णा कुमारी विवाद को लेकर जयपुर से गिंगोली युद्ध (1807); 1818 में अंग्रेज़ों से संधि; त्याग प्रथा पर रोक (1841) |
| तख्तसिंह | 1843-73 | 1857 में अंग्रेज़ों का साथ |
| जसवंतसिंह द्वितीय | 1873-95 | स्वामी दयानंद सरस्वती का जोधपुर आगमन (1883); जसवंत थड़ा उनकी स्मृति में |
| सरदारसिंह | 1895-1911 | जसवंत थड़ा (1906); सरदार संग्रहालय |
| उम्मेदसिंह | 1918-47 | उम्मेद भवन (1929-43); उम्मेद सागर; जोधपुर फ्लाइंग क्लब |
| हनवंतसिंह | 1947-52 | पाकिस्तान में मिलने के इच्छुक, पर सरदार पटेल के प्रयासों से भारत में विलय; 1952 में विमान दुर्घटना में मृत्यु |
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) राठौड़ वंश के मूल पुरुष — राव सीहा (पाली क्षेत्र)। (2) मेहरानगढ़ — राव जोधा (1459), चिड़ियाटूंक पहाड़ी। (3) गिरी-सुमेल (1544) — मालदेव बनाम शेरशाह; “मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान का साम्राज्य खो देता”।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- मारवाड़ में राठौड़ वंश के संस्थापक — राव सीहा; मृत्यु 1273 (बिठू शिलालेख)।
- मंडोर दहेज में मिला — राव चूंडा (1395)।
- जोधपुर की स्थापना — राव जोधा, 12 मई 1459।
- आवल-बावल की संधि — जोधा व कुंभा।
- पाहेबा (1541) — मालदेव ने जैतसी को हराया।
- गिरि-सुमेल (1544) — मालदेव vs शेरशाह; जैता-कूंपा।
- "रूठी रानी" — उमादे (मालदेव की रानी)।
- "मारवाड़ का प्रताप" — चंद्रसेन; नागौर दरबार 1570।
- "मोटा राजा" — उदयसिंह; पुत्री जगत गुसाईं — शाहजहां की माता।
- धरमत युद्ध (1658) — जसवंतसिंह प्रथम; "भाषा भूषण"।
- "राठौड़ों का यूलीसेस" — दुर्गादास; छतरी उज्जैन।
- नाथ संप्रदाय, महामंदिर, गिंगोली युद्ध — मानसिंह।
- “मारवाड़ का प्रताप” — चंद्रसेन।
- धरमत युद्ध (1658) — जसवंतसिंह प्रथम।
- अजीतसिंह के संरक्षक — वीर दुर्गादास राठौड़।
- नाथ संप्रदाय व महामंदिर — महाराजा मानसिंह।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 मारवाड़ में राठौड़ वंश के संस्थापक कौन थे?
2 राव चूंडा को मंडोर किससे दहेज में मिला?
3 जोधपुर नगर की स्थापना कब हुई?
4 "रूठी रानी" किसे कहा जाता है?
5 गिरि-सुमेल युद्ध में मालदेव के किन सेनापतियों ने बलिदान दिया?
6 "मारवाड़ का प्रताप" किसे कहा जाता है?
7 मुगल अधीनता पूर्णतः स्वीकार करने वाला मारवाड़ का पहला शासक कौन था?
8 "भाषा भूषण" ग्रंथ किसकी रचना है?
9 दुर्गादास राठौड़ की छतरी कहां है?
10 गिंगोली युद्ध (1807) किस विवाद के कारण हुआ?