राजस्थान की बावड़ियां, कुंड एवं परंपरागत जल स्रोत

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कम वर्षा वाले राजस्थान में पानी की हर बूंद को सहेजने की परंपरा सदियों पुरानी है। यहां के राजाओं, रानियों और सेठों ने पुण्य कार्य के रूप में बावड़ियां, कुंड, झालरे और तालाब बनवाए, जो जल संरक्षण के साथ-साथ स्थापत्य कला के भी अद्भुत नमूने हैं।

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3500
चांद बावड़ी की सीढ़ियां (लगभग)
🏙️
बूंदी
बावड़ियों का शहर
🏜️
खड़ीन
पालीवाल ब्राह्मणों की देन
💧
जलपुरुष
राजेंद्र सिंह (जोहड़)
📑 विषय सूची 8 टॉपिक

जल स्रोतों के प्रकार

जल स्रोतविवरण
बावड़ी (वापिका)सीढ़ीदार कुआं; नीचे तक उतरने के लिए सीढ़ियां, मंज़िलें व बरामदे
झालराबावड़ी जैसा, पर अपने से ऊंचे तालाब/झील के रिसाव से भरता है; स्वयं का जल स्रोत नहीं; तीन-चार ओर सीढ़ियां
कुंड / कुंडीवर्षा जल संग्रह हेतु गोलाकार, ढका हुआ गड्ढा; पश्चिमी राजस्थान
टांकाघर या खेत में बना पक्का भूमिगत हौज़; छत/आंगन (आगोर) का वर्षा जल एकत्र होता है
नाडीगांव का छोटा कच्चा तालाब; जोधपुर क्षेत्र में अधिक
तालाब / सरबड़ा जलाशय; "आगोर" (जलग्रहण क्षेत्र) से पानी आता है
खड़ीनढलान के नीचे मिट्टी का बांध बनाकर वर्षा जल रोकना व उसी नमी में खेती; जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मणों की देन
कुंई / बेरीतालाब के पास बनी छोटी, गहरी कुइयां, जिनमें रिसकर पानी आता है (पालर पानी व रेजाणी पानी)
जोहड़मिट्टी की मेड़ से बना छोटा तालाब; शेखावाटी व अलवर क्षेत्र
टोबानाडी जैसा, पर अधिक गहरा; पशुओं के लिए भी उपयोगी
💡 पानी के तीन रूप: पालर पानी — सीधे वर्षा से प्राप्त जल; पाताल पानी — भूजल (कुएं से); रेजाणी पानी — भूमि की सतह से नीचे पर पाताल से ऊपर रिसा हुआ जल (कुंई में)।

प्रमुख बावड़ियां

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चांद बावड़ी (आभानेरी)

दौसा · विश्व की सबसे गहरी बावड़ियों में एक

अति महत्वपूर्ण
जिलादौसा
निर्माताराजा चांद (निकुंभ वंश)
समय9वीं सदी
मंज़िलें13
सीढ़ियांलगभग 3500
  • तीन ओर से ज्यामितीय क्रम में बनी सीढ़ियां इसे विश्व की सबसे सुंदर बावड़ियों में शामिल करती हैं।
  • पास में हर्षत माता का मंदिर है; यहां "आभानेरी महोत्सव" आयोजित होता है।
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रानीजी की बावड़ी (बूंदी)

बूंदी — "बावड़ियों का शहर"

महत्वपूर्ण
  • राव राजा अनिरुद्धसिंह की रानी नाथावती ने 1699 ई. में बनवाई।
  • लगभग 46 मीटर गहरी; प्रवेश पर अलंकृत तोरण द्वार और सुंदर मूर्तिकला।
  • बूंदी में 50 से अधिक बावड़ियां होने के कारण इसे "बावड़ियों का शहर" कहा जाता है; अन्य — नागर-सागर कुंड (जुड़वां कुंड), धाभाई कुंड।

🟧 तूरजी का झालरा (जोधपुर)

महाराजा अभयसिंह की रानी (तंवर रानी) ने 18वीं सदी में बनवाया; लाल बलुआ पत्थर की सुंदर नक्काशी। जोधपुर के अन्य — रानीसर-पदमसर तालाब (मेहरानगढ़ के पास)।

🔺 पन्ना मीणा का कुंड (आमेर)

आमेर (जयपुर) में 16वीं सदी का; चारों ओर क्रॉस-आकार की सीढ़ियों का सुंदर ज्यामितीय क्रम।

🌀 त्रिमुखी बावड़ी (उदयपुर)

देबारी में; महाराणा राजसिंह की रानी रामरसदे ने बनवाई; तीन ओर से सीढ़ियां ("जया बावड़ी")।

🎬 हाड़ी रानी की बावड़ी

टोडारायसिंह (टोंक); 17वीं सदी; कई फिल्मों की शूटिंग यहां हुई।

🏛️ नीमराणा की बावड़ी

नीमराणा (कोटपूतली-बहरोड़); नौ मंज़िला; 18वीं सदी।

🐄 गोमुख कुंड (चित्तौड़गढ़)

चित्तौड़ दुर्ग में; चट्टान से गाय के मुख जैसी आकृति से निरंतर जल गिरता है।

🕉️ गलता कुंड (जयपुर)

गलता तीर्थ में प्राकृतिक झरनों से भरने वाले पवित्र कुंड।

प्रमुख तालाब व सागर

तालाबस्थानविशेषता
गड़सीसर (घड़सीसर)जैसलमेरमहारावल गड़सी द्वारा 14वीं सदी में; तट पर टीलों की पोल (टीलो गणिका द्वारा)
गुलाब सागरजोधपुरमहाराजा विजयसिंह की पासवान गुलाबराय द्वारा
बालसमंदजोधपुरमंडोर के पास प्राचीन झील व महल
जैतसागर, नवलसागरबूंदीबूंदी की प्रमुख झीलें
किशोर सागरकोटाबूंदी के राजकुमार धीरदेह द्वारा; बीच में जग मंदिर
तालाब-ए-शाहीबाड़ी (धौलपुर)शाहजहां के सूबेदार द्वारा

जल संरक्षण के प्रयास

💧 राजेंद्र सिंह — "जलपुरुष"

तरुण भारत संघ (अलवर) के माध्यम से सैकड़ों जोहड़ बनवाकर अरवरी नदी को पुनर्जीवित किया। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (2001) और स्टॉकहोम वॉटर प्राइज़ (2015)।

📗 अनुपम मिश्र

प्रसिद्ध पुस्तक "राजस्थान की रजत बूंदें" व "आज भी खरे हैं तालाब" — परंपरागत जल स्रोतों पर।

🏛️ मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान

27 जनवरी 2016 से गांवों को जल के मामले में आत्मनिर्भर बनाने हेतु राज्य सरकार का अभियान।

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) सबसे गहरी बावड़ी — चांद बावड़ी, आभानेरी (दौसा), राजा चांद (निकुंभ) द्वारा। (2) रानीजी की बावड़ी — बूंदी (रानी नाथावती, 1699); बूंदी — बावड़ियों का शहर। (3) टांका — घर में भूमिगत वर्षा जल कुंड; खड़ीन — जैसलमेर की वर्षा आधारित कृषि भूमि (पालीवाल)।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. चांद बावड़ी — आभानेरी (दौसा), राजा चांद, 13 मंज़िलें।
  2. "बावड़ियों का शहर" — बूंदी; रानीजी की बावड़ी — रानी नाथावती (1699)।
  3. तूरजी का झालरा — जोधपुर।
  4. त्रिमुखी बावड़ी — देबारी (उदयपुर), रानी रामरसदे।
  5. हाड़ी रानी की बावड़ी — टोडारायसिंह (टोंक)।
  6. खड़ीन — पालीवाल ब्राह्मण (जैसलमेर)।
  7. रेजाणी पानी — कुंई से प्राप्त होता है।
  8. गड़सीसर तालाब — जैसलमेर; टीलों की पोल।
  9. "जलपुरुष" — राजेंद्र सिंह; अरवरी नदी पुनर्जीवित।
  10. "राजस्थान की रजत बूंदें" — अनुपम मिश्र।
  11. पन्ना मीणा की बावड़ी — आमेर (जयपुर)।
  12. गांव का छोटा तालाब — नाडी (विशेषकर जोधपुर क्षेत्र)।
  13. छोटी कुईं — बेरी (पश्चिमी राजस्थान)।
  14. बावड़ियों का शहर — बूंदी।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 चांद बावड़ी किस जिले में स्थित है?

2 "बावड़ियों का शहर" किसे कहा जाता है?

3 खड़ीन जल संरक्षण पद्धति किसकी देन है?

4 कुंई से प्राप्त जल को क्या कहते हैं?

5 तूरजी का झालरा किस शहर में है?

6 गड़सीसर तालाब कहां स्थित है?

7 "जलपुरुष" के नाम से कौन प्रसिद्ध हैं?

8 हाड़ी रानी की बावड़ी कहां है?

9 "राजस्थान की रजत बूंदें" पुस्तक के लेखक कौन हैं?

10 रानीजी की बावड़ी का निर्माण किसने करवाया?

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